Friday , 4 September 2026
Home आत्मनिर्भर घरेलू हुनर बना सम्मानजनक आय का साधन
आत्मनिर्भरउत्तराखंड न्यूज़

घरेलू हुनर बना सम्मानजनक आय का साधन

टिहरी गढ़वाल जिले के चम्बा ब्लॉक के अंतर्गत बसे छोटे से गांव थान बिडोन की पहाड़ियों में सुबह की पहली किरण जब खेतों और आंगनों को रोशन करती है, तो यहां की महिलाओं की दिनचर्या शुरू हो जाती है। कभी केवल घर-परिवार तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज अपने गांव की पहचान बन चुकी हैं।

थान बिडोन गांव लंबे समय से पलायन की समस्या से जूझता रहा है। युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जाते रहे, और गांव की जिम्मेदारी बुजुर्गों व महिलाओं के कंधों पर आ गई। सीमित संसाधन, छोटी जोत की खेती और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अतिरिक्त आय का कोई स्थायी साधन नहीं था।

इन्हीं परिस्थितियों में गांव की कुछ महिलाओं ने सोचा, ‘क्यों न अपने पारंपरिक हुनर को ही आजीविका का माध्यम बनाया जाए?’ दादी-नानी से सीखी पहाड़ी मसालों की रेसिपी, घर की रसोई में बनने वाले अचार और पहाड़ की शुद्धता, यही उनकी पूंजी थी।

एक विचार से समूह तक

शुरुआत में 5–6 महिलाओं ने मिलकर स्वयं सहायता समूह बनाया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे आम, नींबू, लिंगड़ा, भांग के बीज, जाखिया और अन्य पहाड़ी मसालों से अचार बनाना शुरू किया।

पहले यह अचार सिर्फ अपने उपयोग और पड़ोसियों तक सीमित था, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता ने जल्द ही इसकी मांग बढ़ा दी। लोगों ने कहा, ‘इसमें पहाड़ की मिट्टी की खुशबू है।’

धीरे-धीरे उन्होंने साफ-सफाई, पैकेजिंग और लेबलिंग पर ध्यान देना शुरू किया। घर के आंगन में बनने वाला अचार अब बोतलों में बंद होकर स्थानीय बाजार तक पहुंचने लगा।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम

आज यह पहल एक संगठित स्वरूप ले चुकी है। समूह की महिलाएं हर माह सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। इससे बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बैंक खाते और बचत की आदत बढ़ी,
महिलाओं का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा, सबसे बड़ी बात यह है कि अब वे निर्णय लेने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

गुणवत्ता ही पहचान

इन महिलाओं का मानना है कि ‘विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है।’ इसलिए वे केवल शुद्ध सरसों का तेल प्रयोग करती हैं, पारंपरिक तरीके से धूप में अचार पकाती हैं, किसी भी प्रकार के रासायनिक संरक्षक का उपयोग नहीं करतीं हैं। यही कारण है कि उनका अचार स्थानीय पहचान बन चुका है और ग्राहकों का भरोसा जीत रहा है।

पलायन के बीच उम्मीद की किरण

जहां पहाड़ों से पलायन की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं थान बिडोन की यह पहल गांव में ही रोजगार सृजन का सकारात्मक उदाहरण बन गई है। आसपास के गांवों की महिलाएं और युवा भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

यह केवल अचार बनाने की कहानी नहीं, बल्कि साहस की कहानी, एकजुटता की कहानी, आत्मसम्मान की कहानी और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची मिसाल है।

नई दिशा, नया विश्वास

आज थान बिडोन की महिलाएं केवल अपने परिवार की ताकत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि बड़े सपनों के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े हौसलों की आवश्यकता होती है।

पहाड़ की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत किसी महानगर से नहीं, बल्कि छोटे गांव की रसोई से भी हो सकती है और जब नीयत मजबूत हो, तो एक छोटा कदम भी पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...