बंजर खेतों को लीज में लेकर कर रहे हैं कीवी, सेब और केसर की खेती

बंजर खेतों को लीज में लेकर कर रहे हैं कीवी, सेब और केसर की खेती

कृष्ण सिंह कुमल्टा ने बताया कि सन् 2013 में मेरे मन में एक विचार आया कि मैं एक बाग बनाऊं तथा उसमें जैविक खेती करूं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर जिसमें जाने के लिए 4.5 किमी पैदल रास्ता था उन्होंने हिमालय के नजदीकी क्षेत्र खलझूनी नामक स्थान में 120 नाली बंजर भूमि लीज में लेकर 1000 कीवी के पौधे एवं 650 सेब के पौधों का रोपण किया।

बागेश्वर से 80 किमी दूरी पर कपकोट ब्लाक के सेलिंग गांव के कृष्ण सिंह कुमल्टा ने गांव के लोगों से करीब 120 नाली़ बंजर खेतों को किराये पर लिया और नवम्बर 2019 में वहां पर बागवानी की शुरूआत की। पहले तो गांववासी, उसके बंजर खेतों को किराए में लेने के निर्णय को उसका मूर्खतापूर्ण कदम मान रहे थे पर जब कुमल्टा ने अपनी कड़ी मेहनत से बंजर खेतों को सेब व कीवी के फलों से लकधक किया तो पहले आलोचना करने वाले ही उनके प्रशंसक बन गये। अब उनके बाग में सेब के 450 पेड़ व कीवी के 850 पौधे लग चुके हैं पर अभी भी 80 प्रतिशत जमीन खाली है। उनके बगीचे के सभी पौधे अब फल देने लगे हैं।

कृष्ण सिंह कुमल्टा ने अपने खेतों में कश्मीरी केसर उगाने का प्रयास किया जिसमें वे सफल रहे और अब वे गांव वालों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर केसर की खेती की योजना बना रहे हैं। प्रयोग के तौर पर उन्होंने पुणे से जापानी फ्रूट के पौधे मंगवाए हैं, जो सफलतापूर्वक विकसित हो रहे हैं। उन्होंने अपने बाग में पैशेन फ्रूट भी लगाए हैं जो आस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों का लोकप्रिय फल है।

कृष्ण सिंह ने बताया कि जब उन्होंने बागवानी शुरू की थी तो तब सड़क से उनके बगीचे की दूरी 4.5 किमी थी और पैदल चलकर ही सब सामान वहां ले जाया गया जिसमें उनको काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन अब वे खुश हैं कि उनके बाग तक अब सड़क पहुंच गई है जिससे उनके बागवानी की रफ्तार और तेज हो जाएगी। उनके बाग में उनकी प्रगति को देखने हजारों ग्रामीण आ चुके हैं और वे बागवानी की ओर प्रेरित हो रहे हैं। कृष्ण सिंह ने बताया कि उनके द्वारा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 20-25 लोगों को रोजगार भी दिया जा रहा है तथा 2-3 लोग सदा उनके साथ काम कर रहे है।

वे मधुमक्खी पालन भी हाथ आजमा रहे हैं, जो शहद के साथ-साथ फसलों व फलों के परागण से उत्पादन में वृद्धि करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें बागवानी विभाग की योजनाओं का बहुत लाभ भी मिल रहा है तथा विभाग के विशेषज्ञ उन्हें समय-समय पर तकनीकी मदद भी पहुंचा रहे हैं और आने वाले समय में उनको बागवानी विभाग से और मदद मिलने का आश्वासन दिया गया है।

कृष्ण सिंह कुमल्टा ने बताया कि सन् 2013 में मेरे मन में एक विचार आया कि मैं एक बाग बनाऊं तथा उसमें जैविक खेती करूं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर जिसमें जाने के लिए 4.5 किमी पैदल रास्ता था उन्होंने हिमालय के नजदीकी क्षेत्र खलझूनी नामक स्थान में 120 नाली बंजर भूमि लीज में लेकर 1000 कीवी के पौधे एवं 650 सेब के पौधों का रोपण किया। काफी परिश्रम एवं अथक प्रयासों से पूना, शामा एवं हिमाचल प्रदेश से विभिन्न प्रजाति के पौधे प्राप्त किये।

बगीचे में तारबाड़ एवं खाद पानी की व्यव्स्था हेतु काफी धनराशि व्यय करने के पश्चात वर्तमान में बगीचे में लगभग 850 कीवी एवं 450 सेब के पौधे सुरक्षित हैं तथा यह इस साल से फल दे रहे हैं। मेरे द्वारा लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से स्थानीय परिवारों को जोड़ते हुए विभिन्न प्रकार के पौधे लगवाये जिसमें अखरोट, आडू, पूलम, संतरा तथा नीबू प्रमुख हैं। भविष्य में यहां पर जैविक फल उत्पादन की अपार संभावनायें हैं। आर्युवैदिक दृष्टिकोण से यहां पर कूट-कुटकी एवं काला जीरा का उत्पादन व्यापक स्तर पर हो सकता है।

यहां से जीवन दायिनी, पतित पावनी मां सरयू नदी का उद्गम स्थल होने के कारण यह क्षेत्र धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में भी विकसित हो सकता है। खलझूनी से कफनी ग्लेश्यिर पिण्डारी एवं सुन्दरडूंगा का क्षेत्र भी पर्यटन से जुड़ने की अपार संभावनाये हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this