निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर सफाई कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और गति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मानसून से पूर्व रिस्पना नदी की संपूर्ण सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा ऋतु में जल निकासी व्यवस्था प्रभावित न हो और शहर को जलभराव जैसी समस्याओं से राहत मिल सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि देहरादून की प्राकृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए प्रशासन दीर्घकालिक रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नदी को कूड़ाघर बनने से रोकना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
नगर निगम द्वारा मार्च माह से विशेष स्वच्छता अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक लगभग 17 हजार मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण किया जा चुका है। नगर निगम की ओर से बिंदाल नदी के लगभग आठ किलोमीटर तथा रिस्पना नदी के लगभग 12 किलोमीटर क्षेत्र में व्यापक सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा शहर के विभिन्न नालों, जलधाराओं और नदी तंत्र की नियमित सफाई भी अभियान के रूप में जारी है।
रिस्पना नदी के पुनरुद्धार कार्य को गति देने के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर संसाधन लगाए हैं। वर्तमान में नदी क्षेत्र में 12 जेसीबी मशीनें और 15 डम्पर लगातार कार्य कर रहे हैं। इन मशीनों की मदद से नदी में जमा कूड़ा, मलबा, झाड़ियां तथा अन्य अवरोधों को हटाया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे नदी की प्राकृतिक जलधारा को पुनः सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।
महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि नगर निगम शहर की स्वच्छता और नदी संरक्षण को लेकर गंभीर है। रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे नदियों में कूड़ा फेंकने से बचें और स्वच्छता अभियान में सहयोग करें।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना और जिला स्वच्छता समिति के सहयोग से नदी संरक्षण के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके अंतर्गत उन स्थानों का चिन्हीकरण किया जा रहा है, जहां लंबे समय से कूड़े के ढेर जमा हैं। ऐसे स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर साफ किया जाएगा।
इसके साथ ही प्रशासन का फोकस नदी में गिरने वाले बिना उपचारित नालों पर भी है। जिलाधिकारी ने कहा कि अनट्रीटेड सीवेज और दूषित जल को सीधे नदी में गिरने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनरुद्धार के लिए केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक और व्यवहारिक योजना की आवश्यकता है। इसी दिशा में चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में नदी का प्राकृतिक स्वरूप बहाल किया जा सके।
उन्होंने नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों और सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन, नगर निगम और अन्य विभागों के संयुक्त प्रयासों से रिस्पना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन का लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा। निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर आयुक्त आलोक कुमार पाण्डेय, एसएनएस राजवीर सिंह सहित नगर निगम एवं जिला प्रशासन के कई अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में रिस्पना नदी एक बार फिर स्वच्छ, निर्मल और जीवंत स्वरूप में दिखाई देगी तथा देहरादून की पर्यावरणीय पहचान को नई मजबूती मिलेगी।


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