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बागेश्वर के प्राचीन बागनाथ मंदिर में 400 साल बाद बदल रहा बिजौरा, पुरातत्व विभाग बना रहा म्यूजियम

बागेश्वर के बागनाथ मंदिर को एक बार फिर सजाया-संवारा जा रहा है। यहां पुरातत्व विभाग के संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। इस मंदिर के बिजौरा को इससे पहले 1602 में राजा लक्ष्मी चंद ने बदलवाया था। बताया जाता है कि यह मंदिर 9वीं शताब्दी का बना है।

बागेश्वर के प्राचीन बागनाथ मंदिर में इन दिनों जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि मंदिर में लगभग 400 साल के बाद इसके बिजौरे को बदला जा रहा है। इस काम को करने के लिए देहरादून के अलावा जौनसार से कारीगरों को बुलाया गया है। इसके अलावा मंदिर में पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर की धर्मशाला और काल भैरव मंदिर की धर्मशाला का नवनिर्माण किया जाना है।

साथ ही पुरातत्व विभाग के संग्रहालय का निर्माण भी मंदिर में किया जाना है। इस सौंदर्यीकरण और निर्माण के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की तरफ से घोषणा की गई थी, जिसके बाद सरकार की तरफ से इस नवनिर्माण कार्य के लिए 1.30 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है जिसके बाद पुरातत्व विभाग द्वारा इस पर काम शुरू करा दिया गया है।

 

नवीं शताब्दी में बना था मंदिर

मंदिर के इस बिजौरा ( छज्जे ) को बदलने को लेकर बागनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि बागनाथ मंदिर को नवीं शताब्दी का माना गया है, जिसके बाद 1602 में राजा लक्ष्मी चंद के द्वारा इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया था। इस दौरान उन्होंने मंदिर के बिजौरे को भी बनवाया था जिसके बाद अब इस बिजौरे का फिर से निर्माण किया जा रहा है।

मंदिर के शीर्ष पर इस बिजौरे को लगाने का काम शुरू हो गया है। आपको बता दें कि इस बिजौरा का निर्माण देवदार की लकड़ियों से हुआ है और बिजौरा निर्माण के लिए इस लकड़ी को अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम से लाया गया है जिसमें कत्यूरी काल की कुछ आकृतियों को भी कारीगरों द्वारा उकेरा गया है।

अध्यक्ष रावल ने बताया कि इस मंदिर में पूजा करने के लिए 200 वर्ष पूर्व उनके पूर्वजों को दक्षिण भारत से लाया गया था। उन्होंने बताया कि मन्दिर का जीर्णोद्धार ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस निर्माण कार्य के साथ ही यहां के प्रसिद्ध बाणेश्वर मंदिर का भी निर्माण भी होना है जो कि वर्तमान में पुरातत्व विभाग के अंतर्गत है।

 

मंदिर परिसर में बनेगा पुरातत्व विभाग का संग्रहालय

बागनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय के निर्माण के साथ मंदिर परिसर में स्थित कालभैरव मंदिर का जीर्णोद्धार भी किया जाएगा। कालभैरव मंदिर की धर्मशाला और बागनाथ मंदिर की धर्मशाला का नवनिर्माण भी होगा। बागनाथ मंदिर का बिजौरा (छज्जा) नए स्वरूप में आएगा और बाणेश्वर मंदिर को नया स्वरूप दिया जाएगा। इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर रही कार्यदायी संस्था का फरवरी 2021 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।

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