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लोक संगीत की सतत साधना का अलंकरण, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी को संगीत नाटक अकादमी सम्मान

गढ़रत्न और लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को प्रतिष्ठित संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। दिल्ली में उपराष्ट्रपति एम वैंकयानायडु और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने नरेंद्र सिंह नेगी को यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार के रूप में उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि, अंगवस्त्र और ताम्रपत्र दिया जाएगा।

गढ़रत्न और लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को प्रतिष्ठित संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गयाा। दिल्ली में उपराष्ट्रपति एम वैंकयानायडु और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने नरेंद्र सिंह नेगी को यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार के रूप में उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि, अंगवस्त्र और ताम्रपत्र दिया जाएगा।

नरेंद्र सिंह नेगी को वर्ष 2018 के लिए यह पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा कला और साहित्य जगत की 44 अन्य हस्तियों को भी यह पुरस्कार प्रदान किया गया। 12 अप्रैल को नेगी दा अपने साथी कलाकारों के साथ अपने लोकगीतों की प्रस्तुति भी देंगे।

पर्वतीय जीवन का शायद ही कोई ऐसा पक्ष हो जिस पर नरेंद्र सिंह नेगी की नजर न पड़ी हो और जिस पर उन्होंने गीत की रचना कर उसे अपना मधुर कंठ न दिया हो। उत्तराखंड के खेतों-खलिहानों, जंगलों में घास-लकड़ी लेने अथवा मवेशियों के साथ गई घसेरियों और ग्वैरों, पानी के स्रोत धारा-मंगरों, शादी-विवाह अथवा धार्मिक कार्यक्रमों, घरों और देवालयों अर्थात यत्र-तत्र सर्वत्र यदि कोई एक चीज मौजूद है तो वह है नरेंद्र सिंह नेगी की आवाज।

शुरूआती दौर में नेगी ने गढ़वाली गीत माला के नाम से एकल गीतों के एलबम निकाले। गढ़वाली गीतमाला के 10 भाग निकले। बाद में उन्होंने अपने एलबम को अलग-अलग नाम देना शुरू किया और अन्य गायक-गायिकाओं के साथ गाने लगे। नाम वाला उनका पहला एलबम बुरांश था। नेगी ने मुख्यतः खुद ही गीत का सृजन करते हैं, उन्हें संगीत देते हैं और गाते हैं। लेकिन कुछ गीत उन्होंने अन्य कवियों के भी गाए हैं। अनेक लोकगीतों को भी उन्होंने नया रूप देकर श्रोताओं के सामने रखा है।

नरेंद्र सिंह नेगी अनेक गढ़वाली फिल्मों में भी गीत, संगीत और अपनी आवाज दी है। इन फिल्मों में चक्रचाल, घरजवैं, मेरी गंगा होली मैं मा आली, कौथिग, बंटवारू, छम घुंघरू, जय धारी देवी, सुबेरौ घाम आदि शामिल हैं। नेगी जी की रचनाओं की तीन पुस्तकें खुचकण्डि, मुट बौटिक रख और गाण्यूं की गंगा स्याण्यूं का समोदर भी प्रकाशित हो चुकी है। उनके बहुचर्चित गीत नौछमी नारैणा पर गाथा एक गीत की नामक पुस्तक भी प्रकाशित हुई है।

नरेंद्र सिंह नेगी का जन्म 12 अगस्त 1949 को पौड़ी गांव में हुआ। उन्होंने वहीं से ही अपनी पढ़ाई पूरी की और बाद में संगीत का प्रशिक्षण लेकर आकाशवाणी में तबला वादक के रूप में नौकरी शुरू की। बाद में वह आकाशवाणी की नौकरी छोड़कर सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में आ गए।

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Hill Mail

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