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चारधाम यात्रा 2026 के लिए स्किलिंग पर मंथन: फ्रंटलाइन वर्कफोर्स और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने पर जोर

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से ‘चारधाम यात्रा 2026 हेतु स्किलिंग’ विषय पर 16 अप्रैल 2026 को एक उच्चस्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का आयोजन उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड और कौशल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा (कौशल विकास एवं रोजगार) ने किया। इस अवसर पर पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, कौशल विकास सचिव सी. रविशंकर, अभिषेक रुहेला और नरेंद्र सिंह भंडारी सहित उद्योग विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थागत प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि चारधाम यात्रा की सफलता काफी हद तक उन मानव संसाधनों की क्षमता पर निर्भर करती है, जो जमीनी स्तर पर यात्रियों को सेवाएं प्रदान करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए चर्चा का मुख्य फोकस फ्रंटलाइन कार्यबल को मजबूत करने और समुदाय-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने पर रहा।

पैनल 1: फ्रंटलाइन यात्रा कर्मियों के कौशल विकास पर जोर

पहले पैनल में गाइड, पोर्टर, ड्राइवर और आतिथ्य कर्मियों जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। यह रेखांकित किया गया कि ये कर्मी यात्रियों के लिए प्रथम संपर्क बिंदु होते हैं और सुरक्षा, विश्वास तथा बेहतर यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने में उनकी अहम भूमिका होती है।

मुख्य सुझावों में शामिल रहे :

  • यात्रा सीजन से पहले सभी फ्रंटलाइन भूमिकाओं के लिए न्यूनतम दक्षता मानक तय करना
  • स्थानीय भाषाओं में अल्पकालिक और मॉड्यूलर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना
  • प्रमाणन और पहचान-पत्र आधारित प्रणाली विकसित करना
  • प्रशिक्षण में प्राथमिक उपचार, उच्च हिमालयी परिस्थितियों की समझ, मौसम जानकारी और भीड़ प्रबंधन को शामिल करना

पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि मानकीकरण और प्रमाणन से न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि कार्यबल को औपचारिक पहचान और सम्मान भी मिलेगा।

पैनल 2: स्थानीय समुदायों और उद्यमियों को सशक्त बनाने पर फोकस

दूसरे पैनल में होमस्टे संचालकों, स्थानीय विक्रेताओं, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के कौशल विकास पर चर्चा की गई। इसमें इस बात पर बल दिया गया कि चारधाम यात्रा से मिलने वाले आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचने चाहिए।

प्रमुख बिंदु रहे :

  • ‘यात्रा-तैयार’ होमस्टे मानकों का निर्धारण और प्रचार
  • खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, मेनू मानकीकरण और अपशिष्ट प्रबंधन पर प्रशिक्षण
  • स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प के लिए डिजाइन, ब्रांडिंग और GI टैगिंग में सहयोग
  • ऋण सुविधा, डिजिटल भुगतान और बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित करना

चर्चा में यह भी सामने आया कि लक्षित स्किलिंग के जरिए आत्मनिर्भर और समुदाय-आधारित पर्यटन अर्थव्यवस्था विकसित की जा सकती है।

द्वि-आयामी रणनीति उभरकर सामने आई

बैठक से दो प्रमुख रणनीतिक दिशा स्पष्ट हुईं :

  • यात्रा से जुड़े कार्यबल का मानकीकरण और पेशेवर विकास
  • स्थानीय समुदायों को आर्थिक भागीदारी और समृद्धि के लिए सक्षम बनाना

सरकार का फोकस: रोजगार, गुणवत्ता और स्थिरता

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा, ‘चारधाम यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आर्थिक तंत्र है। हमारा लक्ष्य है कि स्किलिंग के माध्यम से युवाओं को रोजगार, सम्मान और दीर्घकालिक स्थिरता मिले।’

उन्होंने यह भी बताया कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए राज्य में ‘स्किलिंग संवाद सीरीज’ के तहत ऐसे 12 और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि इस तरह की पहलें राज्य के पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएंगी, खासकर सीमांत जिलों में। उन्होंने इसे ग्रामीण पलायन को रोकने की दिशा में भी अहम कदम बताया।

वहीं, सचिव कौशल विकास सी. रविशंकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि बिखरे हुए प्रशिक्षण प्रयासों को एकीकृत कर एक मजबूत स्किलिंग इकोसिस्टम विकसित किया जाए, जिससे रोजगार, उद्यमिता और सेवा गुणवत्ता को जोड़ा जा सके।

PPP मॉडल से बनेगा मजबूत स्किलिंग इकोसिस्टम

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि Public-Private Partnership (PPP), CSR और Tourism Cess Blended Finance जैसे मॉडल के जरिए एक सशक्त, रोजगारोन्मुख और सामुदायिक भागीदारी वाला स्किलिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।

यह पहल उत्तराखंड को एक सुरक्षित, सतत और विश्वस्तरीय तीर्थ पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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