पिछले कई दिनों से उत्तराखंड विधानसभा में हुई नियुक्तियों पर मीडिया में खूब चर्चा हो रही है कि इन भर्तियों में खूब धांधली हुई है और नेताओं ने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को नौकरी लगाई। इन नियुक्तियों को करने में नियम कानून का मजाक उडाया गया और नेताओं के सिफरिसी पत्र से ही कई लोगों की नौकरी लग गई।
अब जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने एक प्रेस वार्ता कर इसमें क्या कार्रवाही होगी उस पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि आज मैं काफी गम्भीर मसले को लेकर प्रेस वार्ता कर रही हूं मैं पिछले कुछ दिन से राज्य में नहीं थी लेकिन मैंने इस बारे में प्रिट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में काफी बात पढ़ी और सुनी। जिसको सुनकर और पढ़कर मैं काफी आहत हुई।
सबसे पहले ऋतु खंडूरी ने तीन सदस्यीय हाईपॉवर कमेटी गठित करने का ऐलान किया जो कि बैकडोर हुई भर्तियों की जांच करेगी और एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। इस उच्च स्तरीय एक्सपर्ट कमेटी की अध्यक्षता पूर्व आईएएस दिलीप कोटिया करेंगे और उनके साथ सुरेन्द्र सिंह रावत और अवनेंद्र सिंह नयाल इस कमेटी में सदस्य होंगे। यह कमेटी इन नियुक्तियों का आधार कितना क़ानूनी तौर पर पुख्ता रहा है उसके बारे में जांच करेगी। जांच करने के बाद कमेटी अपना जो भी फैसला देगी उस पर अमल किया जायेगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाही की जायेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की बात से प्रेरणा लेते हुए कहा कि मैं न खाऊंगी और न खाने दूंगी।
विधानसभा में बैकडोर भर्तियों के नाम पर जिस तरह से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रेमचंद अग्रवाल ने अपनों पर मेहरबानी बरसाई उसे लेकर भी ऋतु खंडूरी काफी आहत हुई। रितु खंडूरी ने कहा कि वह पहले 2012 से 2022 बीच में हुई नियुक्तियों की जांच की जायेगी और उसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो उससे पहले की नियुक्यिं की भी जांच की जायेगी। विधानसभा की भर्तियों के लिए पहले 2000 से 2011 तक उत्तर प्रदेश के नियमावली पर ही भर्तियां होती थी और 2012 के बाद उत्तराखंड ने भर्तियों के लिए अपनी नई नियमावली बनाई थी जिसके बाद नई भर्तियां की गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने सबसे पहले तो पूर्ववर्ती विधानसभा अध्यक्ष और इस वक्त संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा विशेषाधिकार का ‘दुरुपयोग’ कर प्रमोशन पाकर सचिव बनाए गए मुकेश सिंघल को छुट्टी पर भेज दिया है। रितु खंडूरी ने बताया कि मुकेश सिंघल को जांच कमेटी पूछताछ के लिए बुलायेगी तो वह इसमें सहयोग करें।
इससे पहले सीएम धामी ने विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों पर उठ रहे सवालों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूर भूषण को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए जिससे कि नियुक्तियों में अनियमितता का पता चल सके और अगर इनमें अनियमितता पाई गई तो उन नियुक्तियों को रद्द किया जाये। यूकेएसएसएससी के बाद अब विधानसभा में नियुक्तियों का मुद्दा गरमा गया है इससे न केवल राज्य बल्कि देश में भी इस बात की खूब चर्चा हो रही है।
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