Saturday , 5 September 2026
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ईजा

मेरे हिस्से का पहाड़

‘ठुल बाज्यू! मैं तुमर लीजी सिकार ली बै आनूं

उंगलियों से ईजा की धोती के पल्लू को लपेटकर सिसकियां भरने वाले दृश्य जेहन में उभर आते हैं। ईजा जितनी बार गुस्सा होती,...

मेरे हिस्से का पहाड़

‘नोहपन लफाई और डरे तो नि छै, च्यले कें छाव लागि गो रे’

कंधे पर 10 लीटर का पानी का डिब्बा लिए मैं पूरी फुर्ती के साथ चल रहा था। सर्दियों के दिन होने के बावजूद...