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कोरोना काल में जिस समय लोग संक्रमण के डर से घरों में हैं, उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में प्रकृति ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ की घटनाओं से पिथौरागढ़ जिला काफी प्रभावित हुआ है।
READ MOREकहते हैं न कि अपने लिए जिये तो क्या जिए। दूसरों की मदद कर उसके चेहरे पर मुस्कान लाने से बड़ा कोई पुण्य कार्य क्या हो सकता है। पिथौरागढ़ में पिछले दिनों एक के बाद एक भारी बारिश, भूस्खलन में घर जमींदोज हो गए और कई लोगों की जान चली गई।
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कोरोना काल में जिस समय लोग संक्रमण के डर से घरों में हैं, उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में प्रकृति ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ की घटनाओं से पिथौरागढ़ जिला काफी प्रभावित हुआ है।
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कहते हैं न कि अपने लिए जिये तो क्या जिए। दूसरों की मदद कर उसके चेहरे पर मुस्कान लाने से बड़ा कोई पुण्य कार्य क्या हो सकता है। पिथौरागढ़ में पिछले दिनों एक के बाद एक भारी बारिश, भूस्खलन में घर जमींदोज हो गए और कई लोगों की जान चली गई।
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