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ऐसी मान्यता है कि मां गंगा जी लगभग 32 दिनों तक शिव जी की जटाओं में विचरण करती रहीं, बहती रही, घूमती रही है और फिर, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान शिव ने अपनी एक जटा खोली और गंगा मां धरती पर अवतरित हुईं।
READ MOREहिमालयी राज्यों में अभी हाल में हुई भारी बर्फबारी हिमालय के पर्यावरण के लिए, हिमालय के सौंदर्य के लिए वरदान है… बर्फ ही हिमालय का सौंदर्य है और आभूषण भी।
READ MOREमां गंगा हमारे जीवन का आधार है। सनातन संस्कृति का प्रमुख अंग है, हमें गंगा की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना है। स्वच्छता के प्रयासों में सरकार के साथ आमजन की भी सहभागिता जरूरी है।
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ऐसी मान्यता है कि मां गंगा जी लगभग 32 दिनों तक शिव जी की जटाओं में विचरण करती रहीं, बहती रही, घूमती रही है और फिर, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान शिव ने अपनी एक जटा खोली और गंगा मां धरती पर अवतरित हुईं।
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हिमालयी राज्यों में अभी हाल में हुई भारी बर्फबारी हिमालय के पर्यावरण के लिए, हिमालय के सौंदर्य के लिए वरदान है… बर्फ ही हिमालय का सौंदर्य है और आभूषण भी।
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