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Guest Article by पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, पर्यावरणविद् एवं मैती आंदोलन के प्रणेता I
गौरा देवी के चिपको आंदोलन में शामिल रही महिलाओं ने साल 2010 में ‘चिपको स्मृति यात्रा’ के दौरान एक धार में खड़े होकर ऋषिगंगा में बन रही जल विद्युत परियोजना को दिखाते हुए कहा था कि यह हमारे विनाश का कारण बनेगा। हमारे सारे पेड़ काट दिए गए हैं और हमारा गांव अंदर ही अंदर से खोखला हो गया है। गौरा देवी के साथ प्रमुख रूप से कार्य करने वाली तथा गौरा देवी की सहेली श्रीमती बटनी देवी ने कहा था कि हमने कितना समझा दिया है इनको, पर ये समझते ही नहीं। सरकार भी हमारी कुछ सुनती नहीं, हम क्या करें?
READ MOREपद्मभूषण से सम्मानित सुंदर लाल बहुगुणा को 8 मई को बुखार और खांसी की शिकायत के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शुक्रवार दोपहर 12 बजे निधन हो गया। 94 वर्षीय बहुगुणा कोविड संकमित थे। चिपको आंदोलन के कारण उन्हें विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्धि मिली। ।
READ MOREचिपको आंदोलन की जननी गौरा देवी का जन्म 1925 में उत्तराखंड के लाता गांव में हुआ था। उस समय गांव में काफी बड़े पेड़-पौधे थे तो गौरा देवी का उनसे काफी लगाव हो गया। 12 साल में शादी रैणी गांव में हुई। पति किसान थे, पर शादी के 10 साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। ऐसे मुश्किल हालात में आगे बढ़कर गौरा देवी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं।
READ MOREआज ही के दिन उत्तराखंड की धरती से पेड़ों को बचाने का महाअभियान शुरू हुआ था। महिलाओं ने इस मूवमेंट में बड़ी भूमिका निभाई। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए पुरुष ही नहीं महिलाएं भी पेड़ों से चिपक जाती थीं। आइए याद करें पर्यावरण बचाने वाले उन योद्धाओं को।
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Guest Article by पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, पर्यावरणविद् एवं मैती आंदोलन के प्रणेता I
गौरा देवी के चिपको आंदोलन में शामिल रही महिलाओं ने साल 2010 में ‘चिपको स्मृति यात्रा’ के दौरान एक धार में खड़े होकर ऋषिगंगा में बन रही जल विद्युत परियोजना को दिखाते हुए कहा था कि यह हमारे विनाश का कारण बनेगा। हमारे सारे पेड़ काट दिए गए हैं और हमारा गांव अंदर ही अंदर से खोखला हो गया है। गौरा देवी के साथ प्रमुख रूप से कार्य करने वाली तथा गौरा देवी की सहेली श्रीमती बटनी देवी ने कहा था कि हमने कितना समझा दिया है इनको, पर ये समझते ही नहीं। सरकार भी हमारी कुछ सुनती नहीं, हम क्या करें?
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पद्मभूषण से सम्मानित सुंदर लाल बहुगुणा को 8 मई को बुखार और खांसी की शिकायत के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शुक्रवार दोपहर 12 बजे निधन हो गया। 94 वर्षीय बहुगुणा कोविड संकमित थे। चिपको आंदोलन के कारण उन्हें विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्धि मिली। ।
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