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प्रोफेसर वल्दिया ने अपनी आत्मकथा ‘पथरीली पगडंडियों पर’ में अपने जीवन के कई पन्नों को शब्दों में व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि जब वह हाई स्कूल में थे तब डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। पिथौरागढ़ में हाई स्कूल से आगे की पढ़ाई के लिए तब इंटर कॉलेज नहीं था। उन्होंने क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ में दाखिला लिया।
READ MOREभूविज्ञान के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने डॉ. खड़ग सिंह वाल्दिया को 2007 में पद्मश्री और 2015 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। पद्मश्री और पद्मभूषण के अतिरिक्त उन्हें दर्जनों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।
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प्रोफेसर वल्दिया ने अपनी आत्मकथा ‘पथरीली पगडंडियों पर’ में अपने जीवन के कई पन्नों को शब्दों में व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि जब वह हाई स्कूल में थे तब डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। पिथौरागढ़ में हाई स्कूल से आगे की पढ़ाई के लिए तब इंटर कॉलेज नहीं था। उन्होंने क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ में दाखिला लिया।
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भूविज्ञान के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने डॉ. खड़ग सिंह वाल्दिया को 2007 में पद्मश्री और 2015 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। पद्मश्री और पद्मभूषण के अतिरिक्त उन्हें दर्जनों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।
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