उत्तराखंड के कोटद्वार और आसपास के इलाकों में लंबे समय से दहशत का कारण बना गुलदार आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल था। वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से रेस्क्यू सेंटर भेज दिया। बताया जा रहा है कि केटीआर (कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व) से सटे आबादी क्षेत्र में यह गुलदार लंबे समय से सक्रिय था। गुलदार ने बीते कुछ दिनों में कई घटनाओं को अंजाम दिया, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई थी। महिलाओं और मवेशियों पर हमलों की घटनाएं सामने आने के बाद वन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और विशेष टीम का गठन किया गया।
जानकारी के अनुसार, गुलदार ने कोटद्वार क्षेत्र के कई गांवों में आतंक मचा रखा था। देवारणी गांव में गुलदार दो शवों के पास देखा गया था, जिसके बाद इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया। वहीं, चंपावत जिले के एक गांव में घर के आंगन में काम कर रही महिला पर गुलदार ने झपट्टा मार दिया। महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा गुलदार ने मवेशियों को भी निशाना बनाया। अलग-अलग गांवों में दो गाय, एक बकरा और चार मुर्गियों को मारने की घटनाएं सामने आईं। ग्रामीणों का कहना था कि गुलदार रात के समय गांव में घुस आता था, जिससे लोग घरों से बाहर निकलने से डरने लगे थे। बच्चों और महिलाओं में भय का माहौल था।
वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए, ट्रैप कैमरे लगाए गए और रात-दिन निगरानी की गई। आखिरकार वन विभाग की टीम को सफलता मिली। गुलदार को ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में कैद किया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी, डॉक्टर और रेस्क्यू टीम पूरी तरह सतर्क रही। गुलदार को पकड़ने के बाद उसे प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए ले जाया गया और फिर सुरक्षित रूप से रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए गए।
गुलदार के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद अब वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और जंगल से सटे इलाकों में अनावश्यक रूप से अकेले न जाएं।
यह घटना एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। वन विभाग का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।




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