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उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरपौड़ी गढ़वाल

सांसद अनिल बलूनी के गांव में भी धूमधाम से मनाया गया इगास का त्यौहार

उत्तराखंड में इगास पर्व ज्योति का पर्व है। यह हमारी संस्कृति परंपरा और विरासत का प्रतीक है। उत्तराखंड के राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी के गांव नकोट कोट ब्लॉक में धूमधाम से इगास का पर्व मनाया गया।

सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड के सभी प्रवासी लोगों से अपील की थी कि उत्तराखंड के गांव को जीवित रखने के लिए सभी प्रवासी लोग इगास के पर्व को अपने गांव में मनाए ताकि हम अपने लोक पर्व से अपनी आने वाली पीढ़ी को भी रूबरू करवा सके साथ ही हमारा जो प्रेम अपने गांव के लिए था वह भी बरकरार रह सके।

उन्होंने स्वयं दो बार अपने गांव आकर इस लोक पर्व को मनाया हालांकि स्वास्थ्य सही ना होने के चलते कई बार वह अपने गांव नहीं पहुंच सके लेकिन उनके प्रतिनिधि के तौर पर कोई न कोई उनके गांव आकर इस त्यौहार में शामिल जरूर हुआ है।

वही प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद रहे संजय बलूनी ने बताया कि इस बार भी संसद की महत्वपूर्ण बैठक होने के चलते अनिल बलूनी अपने गांव नहीं पहुंच पाए लेकिन उनके इस आह्वान को देखते हुए उनके गांव में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जा रहा है उनके घर पर पारंपरिक पकवान को बनाया और गौपूजन भी किया गया।

वही अनिल बलूनी की चाची ने बताया उन्हें फोन पर जानकारी दी गयी कि इस बार आना संभव नही है लेकिन एक महीने के अंदर वह अपने गांव आएंगे।

प्रवासी चिंतामणि ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज उत्तराखंड के गांव खाली हो चुके हैं और पौड़ी के जो गांव है वह भी पढ़ाई की चपेट में आ चुके हैं यदि इस पर सभी लोग अपने गांव आते हैं तो गांव में चहल पहल होने के साथ है यहां रहने वाले लोगों को भी काफी खुशी मिलेगी।

हमारे देश में अनेक पर्व मनाये जाते हैं और भारतीय जीवन में लोक परंपरा पर्वों का अपना महत्व है। सूर्य पूरे संसार को प्रकाश देता है लेकिन अद्भुत पूरी दुनिया में सूर्य उपासना का सबसे बड़ा पर्व छट के रूप में मनाते हैं। दिशा बदलते सूर्य की उपासना में उत्तराखंडी मकरायणी मनाते हैं।

यही देश है जो समुद्र के विस्तार और सूर्य के ओज को महसूस कर पोंगल उत्सव मनाता है। कृषि खेती के उपकार को नमन कर बिहू का उत्सव मनाता है। लोकनृत्य की छटा बिखेरता है। कामना करता हूं कि हम सब भारतीयों में सब पर्वों के लिए सम्मान और उत्सवधर्मिता बनी रहे।

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