Saturday , 5 September 2026
Home सरोकार उत्तराखंड में कानून विश्वविद्यालय का लंबित सपना: जिम्मेदार कौन?
सरोकारउत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरदेहरादून

उत्तराखंड में कानून विश्वविद्यालय का लंबित सपना: जिम्मेदार कौन?

यह स्थिति राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

सरकार ने कई बार आश्वासन दिए, भूमि चयन की बातें हुईं, समितियां बनीं, लेकिन हर बार मामला फाइलों और बैठकों में ही उलझकर रह गया। यह सिर्फ देरी नहीं, बल्कि निर्णय लेने की कमजोर इच्छाशक्ति और प्रशासनिक ढिलाई का उदाहरण है।

अगर शुरुआत में ही स्पष्ट योजना और समयसीमा तय की जाती, तो आज यह स्थिति नहीं होती।

जब देश के अन्य राज्य अपने-अपने विधि विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं, तब उत्तराखंड अब भी बुनियादी ढांचे के लिए जूझ रहा है।

यह विडंबना ही है कि शिक्षा और युवाओं की बात करने वाली सरकार इस अहम परियोजना को प्राथमिकता नहीं दे पा रही।

प्रदेश के छात्र-छात्राओं को बेहतर कानूनी शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ता है।

कई प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाते हैं, जिसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

सरकार को अब केवल घोषणाओं और भाषणों से आगे बढ़कर वास्तविक कार्यवाही करनी होगी।

प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम में तेजी लानी होगी और तय समयसीमा के भीतर परिणाम देना होगा। जरूरत है पारदर्शिता की, जवाबदेही की और ठोस निर्णय लेने की।

यदि अब भी यही ढुलमुल रवैया जारी रहा, तो यह मुद्दा केवल एक अधूरी परियोजना नहीं रहेगा, बल्कि जनता के विश्वास पर भी गहरा आघात करेगा।

उत्तराखंड के युवाओं को अब और इंतजार नहीं, बल्कि ठोस कदम और स्पष्ट परिणाम चाहिए।

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...