4 दशकों के सार्वजनिक जीवन का दिया हवाला
धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं और छात्रों को संबोधित करते हुए एक भावुक संदेश जारी किया। उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशकों से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के प्रति समर्पित रहे हैं। उनका हमेशा से मानना रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा का अवसर मिलने पर आभार भी प्रकट किया।
परीक्षा में धांधली और सरकार के कदम
अपने बयान में उन्होंने इस वर्ष 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा में सामने आई धांधली और अनियमितताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि मामला सामने आते ही भारत सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया, मामले की गहन जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए परीक्षा को रद्द कर दिया।
आगे की व्यवस्था: केंद्र सरकार ने परीक्षा माफियाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा को कंप्यूटर-बेस्ड-टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने का ऐतिहासिक फैसला भी लिया है।
‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ से कराई गई पुनः परीक्षा
शिक्षा मंत्री ने बताया कि लगभग 20 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार की पहली प्राथमिकता निष्पक्ष पुनः परीक्षा कराना था। इसके लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ अपनाते हुए केंद्र, राज्य और जिला प्रशासन ने मिलकर काम किया। छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून को पुनः परीक्षा का आयोजन हुआ और 16 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए, जिसमें गरीब और मेधावी छात्रों को सफलता मिली।
“ज़िम्मेदारी से कभी मुंह नहीं मोड़ा”
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पहले ही दिन से उन्होंने इस पूरी स्थिति की जिम्मेदारी ली और किसी भी परिस्थिति से पीछे नहीं हटे। उनका एकमात्र संकल्प यह था कि किसी भी मेधावी छात्र का करियर परीक्षा माफिया की वजह से बर्बाद न होने पाए और न ही किसी के साथ कोई अन्याय हो। हालांकि, उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस संवेदनशील समय में भी जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों द्वारा छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं डालने का प्रयास किया गया।
इस्तीफा देने की मुख्य वजह
जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला उनके लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में बनी इस स्थिति का कोई राष्ट्रविरोधी ताकतें गलत फायदा न उठा लें और देश की एकता पर आंच न आए।
उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि भारत का एक भी विद्यार्थी कानूनी पेचीदगियों में उलझे या उसका समय खराब हो। छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का मन बनाया।
भविष्य में भी राष्ट्र सेवा का संकल्प
अपने संदेश के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री, अपने साथी मंत्रियों और मंत्रालय के अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री जगन्नाथ जी के आशीर्वाद से वे आगे भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।


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