जिला पंचायत सभागार में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन को मजबूत करने का संदेश देना था, लेकिन कार्यक्रम पार्टी के अंदरूनी मतभेदों की भेंट चढ़ गया। बताया गया कि निकाय चुनाव के बाद से विधायक मयूख महर और पार्टी के एक वर्ग के बीच नाराजगी बनी हुई थी। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आग्रह पर विधायक सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे थे, ताकि संगठन में एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
कार्यक्रम की शुरुआत महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष भावना नगरकोटी के संबोधन से हुई। अपने भाषण के दौरान उन्होंने निकाय चुनाव का मुद्दा उठाते हुए विधायक मयूख महर पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनाव में पार्टी की हार और संगठन में टूट के लिए विधायक की कार्यशैली जिम्मेदार रही। उनका कहना था कि कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर ऐसे व्यक्ति को चुनाव मैदान में उतारा गया, जिसने पार्टी की सदस्यता तक नहीं ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से पार्टी का झंडा उठाने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी पैदा हुई।
महिला जिलाध्यक्ष के आरोपों के दौरान सभागार का माहौल अचानक गर्म हो गया। विधायक मयूख महर ने इसे अपना अपमान मानते हुए मंच छोड़ दिया। उनके बाहर निकलते ही कुछ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे कार्यक्रम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पीछे छूट गया।
स्थिति को संभालने के लिए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधायक हरीश धामी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक नारेबाजी जारी रही। अंततः विधायक अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गए।
हंगामे के बीच प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर इस तरह की गुटबाजी और आपसी संघर्ष पार्टी के हित में नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जो ऊर्जा और ताकत वे एक-दूसरे के खिलाफ दिखा रहे हैं, यदि वही भाजपा के खिलाफ दिखाई जाए तो संगठन को अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर मतभेद दूर करने होंगे और पार्टी को मजबूत बनाने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।
गोदियाल ने भरोसा दिलाया कि वह विधायक मयूख महर सहित सभी संबंधित नेताओं से बातचीत कर आपसी मतभेद समाप्त करने का प्रयास करेंगे। हालांकि हंगामे के कारण उन्होंने अपना संबोधन संक्षिप्त रखा और कार्यक्रम निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप आगे नहीं बढ़ सका।
घटना के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस संगठन ने अनुशासनहीनता के मामले में सख्त रुख अपनाया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नेताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार और अनुशासनहीनता के आरोप में भावना नगरकोटी, पूर्व जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह लुंठी और दीपक लुंठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। तीनों से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
इसके साथ ही प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भावना नगरकोटी को जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया। इतना ही नहीं, पूरी जिला महिला कांग्रेस कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव (संगठन) राजेंद्र भंडारी ने बताया कि पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी से निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा गया है।
पिथौरागढ़ की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब कांग्रेस प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर सामने आई गुटबाजी ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश नेतृत्व आपसी मतभेदों को किस तरह सुलझाता है और अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद संगठन में किस प्रकार का संदेश जाता है।




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