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‘काई’ बड़े काम की! उत्तराखंड में खुरपाताल के पास खुला पहला मॉस गार्डन

प्रकृति ने हमें बहुत सी ऐसी चीजों से नवाजा है, जिसके बारे में कम लोग ही जानते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत देन है मौस। देखने में जमीन पर, पेड़ों पर लिपटी या पानी में हरी-हरी ये काई बेकार सी लगती है पर इसकी खूबी जानकर आप हैरान रह जाएंगे...।

‘काई’ में ऐसा क्या होता है कि उसे संरक्षित करने की जरूरत महसूस होने लगी है। क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में नैनीताल मार्ग पर खुरपाताल के पास पहला ‘काई’ यानी मॉस गार्डन तैयार किया गया है। वन अनुसंधान केंद्र ज्योलिकोट, नैनीताल ने इसे तैयार किया है। यह मॉस, फर्न ,लाइकन व अन्य वनस्पतियों के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण गार्डन साबित होगा। जल्द ही इस गार्डन को पर्यटन के लिए भी खोला जा सकता है।

हिल-मेल से बातचीत में वन क्षेत्राधिकारी (अनुसंधान) मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि इस गार्डन को वन अनुसंधान विंग के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के निर्देशन में तैयार किया गया है। उन्होंने मॉस की कई खूबियां गिनाते हुए समझाया कि हमारे पर्यावरण, जनजीवन के लिए यह मॉस कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मौस एक तरह की काई होती है, जो दीवारों, पेड़ों पर हरे-हरे रंग की दिखती है। मॉस का औषधि में बहुतायत में इस्तेमाल होता है। यह वायु प्रदूषण को रोकने में मदद करता है क्योंकि इससे फिल्टरेशन होता है। नदियों के जल या अन्यत्र जल को फिल्टर करने में इसकी बड़ी भूमिका है। यह जल प्रदूषण को भी रोकता है। उन्होंने बताया कि

 

घायल सैनिकों के इलाज के लिए होता था इस्तेमाल

वन क्षेत्राधिकारी ने कहा कि आज ही नहीं, विश्व युद्ध के समय में भी घायल सैनिकों के इलाज में इस मॉस का इस्तेमाल किया जाता था। बहुत सी चीजों में इस मॉस का इस्तेमाल है, लेकिन अभी तक इसके बारे में लोग कम जानते थे। इसीलिए मॉस प्रजातियों का संरक्षण करने के लिए मॉस गार्डन बनाया गया है। यह नैनीताल रूट पर खुरपाताल के पास है।

 

उन्होंने आगे कहा कि 25-30 नेटिव प्रजातियों को इकट्ठा किया जा रहा है। ऊंचाई पर होने वाली मॉस को भी संरक्षित करने का प्लान है। लोगों के देखने के लिए क्या इस गार्डन को खोला जाएगा, इस सवाल ने मदन सिंह ने बताया कि अभी लॉकडाउन के कारण बंद रखा गया है, अब इसे जल्द ही खोलने जा रहे हैं। यहां छात्र, शोधकर्ता और दूसरे लोग आकर मॉस के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।

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Hill Mail

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