नैनीताल में हाईकोर्ट के सामने कई चुनौतियां
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि नैनीताल में वर्तमान हाईकोर्ट परिसर की भौगोलिक स्थिति के कारण कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। चाइना पीक की तलहटी में स्थित न्यायालय परिसर में भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा नैनीताल प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण यहां वर्षभर पर्यटकों और न्यायालय से जुड़े लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के चलते शहर में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर न्यायालय आने वाले न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम नागरिकों पर भी पड़ता है। पार्किंग की सीमित व्यवस्था और संकरी सड़कों के कारण आवागमन में भी परेशानी होती है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हाईकोर्ट के लिए नए और आधुनिक परिसर की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
लामाचौड़ में प्रस्तावित है स्थायी परिसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में प्रस्तावित भूमि हाईकोर्ट के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए उपयुक्त हो सकती है। यह क्षेत्र सड़क मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसर विकसित होने से न्यायिक कार्यों के विस्तार के साथ न्यायिक सेवाओं को अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।
प्रस्तावित परिसर में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे न्यायालय से संबंधित कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में भी मदद मिलेगी।
वन भूमि हस्तांतरण पर जल्द कार्रवाई की मांग
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदेश के अनुरूप हाईकोर्ट के नए भवन के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराना और निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका कब्जा एवं हस्तांतरण सुनिश्चित करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन मंत्री से लामाचौड़ क्षेत्र में प्रस्तावित आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण और वन भूमि डायवर्जन से जुड़े प्रस्ताव पर जल्द आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था को मजबूत, आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा सके।
हल्द्वानी में हाईकोर्ट का स्थायी परिसर बनने से उत्तराखंड की न्यायिक आधारभूत संरचना को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भूमि हस्तांतरण और वन विभाग की आवश्यक मंजूरियों के बाद ही निर्माण की दिशा में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मुख्यमंत्री की इस मुलाकात को हाईकोर्ट शिफ्टिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




Leave a comment