भारतीय नौसेना की एक पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक में 14 अगस्त को एक भयानक विस्फोट हुआ जिसके बाद उसमें आग लग गई। इस विस्फोट के कारण यह पनडुब्बी जलमग्न हो गई और इसका सिर्फ एक हिस्सा ही दिखाई दे रहा था। उसके बाद नौसैनिक डाकयार्ड और मुम्बई फायरब्रिगेड की दमकल गाड़ियां काम पर लगाई गयी। दुर्घटना के समय इसमें तीन अधिकारी और 18 नौसैनिक मौजूद थे। दुर्घटना के कारणों की छानबीन के लिए एक बोर्ड ऑफ इंक्वायरी गठित कर दी गयी है।
नौसेना के गोताखोरों ने 14 अगस्त की शाम को आईएनएस सिंधुरक्षक में प्रवेश किया और उसमें फंसे हुए 18 कार्मिकों की स्थिति का पता लगाने के लिए दिन-रात अपने प्रयास जारी रखे। ये कार्मिक दुर्घटना के समय पनडुब्बी के भीतर थे। 18 सैनिकों में से पांच सैनिकों को ढूंढ लिया गया लेकिन इनके शवों को पहचान पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। डीएनए जांच से ही इनकी पहचान हो पायेगी।
बाकी फंसे हुए कार्मिकों को अभी तक ढूंढा नहीं जा सका है। पनडुब्बी (जिसमें पानी भर गया है) के भीतर रोशनी कम होने, अत्यंत सीमित स्थान रहने और उसके ज्यादातर उपकरणों के अपने स्थान से अस्त व्यस्त होने के कारण गोताखोरों के प्रयासों में रुकावट आ रही है। विस्फोट की अग्नि से पनडुब्बी का भीतरी हिस्सा पिघल गया है, जिससे पनडुब्बी के झोल विकृत हो गए हैं और उसके हिस्सों में पहुंचने में रुकावट आ रही है। पनडुब्बी से पानी बाहर निकालने के लिए हैवी ड्यूटी पम्पों का इस्तेमाल किया जा रहा है। विस्फोट के कारण भारी मात्रा में समुद्र का जल पनडुब्बी में प्रवेश कर गया था।
गौरतलब है कि इस पनडुब्बी में तीन अधिकारियों समेत 15 नौसैनिक मौजूद थे। इन अधिकारियों में लेफ्टिनेंट कमांडर निखिलेश पाल, आलोक कुमार और आर वेंकिटराज शामिल हैं, जबकि सैनिकों में संजीव कुमार, केसी उपाध्याय, टिमोथी सिन्हा, केवल सिंह, सुनील कुमार, दसारी प्रसाद, लीजू लारेंस, राजेश टूटिका, अमित के सिंह, अतुल शर्मा, विकास ई, नरोत्तम देउरी, मलय हलदर, विष्णु वी और सीताराम बडापल्ली शामिल हैं।
हिलमेल ब्यूरो


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