केदारनाथ धाम के कपाट भैया दूज के दिन मंत्रोच्चारण और विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
भगवान आशुतोष के 11वे ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट शुभ लग्न पर बंद हुए, इसके बाद भगवान केदार की डोली रामपुर के लिए रवाना कर दी गई।
15 नवंबर को चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी। यहां ओंकारारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की शीतकाल के छह माह पूजा होगी।
13 नवम्बर के शुभ लग्न पर केदारनाथ धाम के कपाट मंदिर के मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग द्वारा विधि-विधान के साथ बंद किए गए।
इससे पहले बाबा के स्वयंभू ज्योर्तिलिंग को समाधि रूप दिया गया। मंदिर के गर्भगृह में विशेष भस्म एवं समाधि पूजा के साथ लिंग को भस्म से ढक दिया गया।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद कर ताले को सील किया गया।
पूजा-अर्चना के साथ बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली ने मंदिर की परिक्रमा की और इसके उपरांत शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
हिलमेल ब्यूरो


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