इस अवसर पर डा. एस.के. मल्होत्रा ने कहा कि आजादी के 75 वर्षो में वैज्ञानिकों एवं कृषकों के अथक प्रयासों से भारत ने साढे़ सोलह गुना औद्यानिक उत्पादन किया है, जिसको अब बचाने की आवश्यकता है ताकि हर जरूरतमंद को उचित पोषण मिल सके। उन्होंने कहा कि औद्यानिकी में ज्ञानवर्धक विचारों को निरन्तर समाहित करके इसका उच्च स्तर तक विकास सम्भव है। हमें जैविक उर्वरकों का वर्तमान की अपेक्षा तीन गुना अधिक प्रयोग कर गुणवत्तायुक्त औद्यानिक उत्पादन करने की आवश्यकता है। प्रत्येक राज्य में पत्ती विश्लेषण परामर्शी प्रयोगशाला स्थापित करनी होगी, ताकि फलों एवं सब्जियों में उचित मात्रा में पोषक तत्वों की आपूर्ति की जा सके। तुड़ाई पश्चात् हानि को रोकने हेतु एकीकृत उत्पादन, विपणन, प्रसंस्करण एवं शीत श्रृंखला का विकास करना होगा क्योंकि भारतीय कृषि का भविष्य औद्यानिक विकास पर ही आधारित है।
उन्होंने कहा कि हमें औद्यानिक उत्पादों का आयात को कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना होगा ताकि देश की 60 प्रतिशत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर खाद्य उपलब्धता में भारत विश्व में सिरमौर हो सके और पूरे विश्व को पोषण प्रदान करें। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने वर्षा आधारित जल के संरक्षण एवं उसकी हर बूंद के प्रयोग की आवश्यकता के बारे में बताया।
इससे पूर्व तीन-दिवसीय कान्कलेव में देशभर के 24 राज्यों से 26 कृषि विश्वविद्यालयों के लगभग 225 शोधार्थी एवं 150 वैज्ञानिकों ने विभिन्न सत्रों में प्रतिभागिता की। विभिन्न उपविषयों पर कुल 12 तकनीकी एवं पोस्टर सत्र आयोजित किये गये, जिसमें लगभग 50 आमंत्रित वक्ताओं के व्याख्यान एवं 100 से अधिक शोधार्थियां एवं वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुतिकरण किया गया। मौखिक एवं पोस्टर सत्रों के विजेताओं को पुरस्कृत एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।
इस अवसर पर आयोजन समिति द्वारा पदमश्री उमाशंकर पांडे; वन अधिकारी मदन सिंह बिष्ट; बाई साइकिल मैन नीरज प्रजापति एवं एन.डी.यू.ए.टी., मस्ती यू-ट्यूब चैनल के शिवप्रताप को कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया। सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर एवं पीएचडी थीसिस हेतु तीन-तीन शोधार्थियां को पुरस्कृत किया गया।
आयोजन समिति के समन्वयक डा. एस.के. द्विवेदी द्वारा उन्नत तकनीकों को किसानों तक पहुंचने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कानक्लेव में ज्ञान-विज्ञान को तकनीकी रूप देकर अधिक उपयोगी जैसे रोजगारपरक, पर्यावरण अनुकूल, पोषण संवर्धन और उद्यम हितैषी बनाने पर जोर दिया गया और इसके रणनीति बनाने पर बल दिया गया। साथ ही अगला प्रोग्रेसिव हार्टीकल्चर कान्कलेव (च्भ्ब् 2024) नवसारी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। कान्कलेव का धन्यवाद प्रस्ताव आयोजन सचिव, डा. रंजन श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस अवसर पर उद्यान एवं सब्जी विभाग के समस्त प्राध्यापक, विद्यार्थी, कर्मचारी, समस्त आगन्तुक वैज्ञानिक एवं शोधार्थी मौजूद रहें।


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