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दिसंबर से दिल्ली-हरिद्वार का सफर होगा आसान, ढाई घंटे में पहुंच सकेंगे यात्री

उत्तराखंड में अर्धकुंभ-2027 की तैयारियों के बीच दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली और हरिद्वार के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए निर्माणाधीन 51 किलोमीटर लंबा स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस छह लेन के कॉरिडोर का 99 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि दिसंबर 2026 से इस मार्ग को वाहनों के लिए खोलने की तैयारी है।

 

नया कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार आने वाले यात्रियों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि इस वैकल्पिक मार्ग से दिल्ली से हरिद्वार का सफर करीब ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल पर्यटकों और श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, बल्कि हरिद्वार में यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।

51 किलोमीटर लंबा है छह लेन का कॉरिडोर

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार, स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। बहादराबाद टोल प्लाजा के पास एक छोटे हिस्से में काम बाकी है, जिसे जल्द पूरा करने की योजना है।

यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हलगोया मुस्तकम से शुरू होकर भगवानपुर, सालियर और कलियर होते हुए भड़ेड़ी राजपूताना तक पहुंचेगा। इसके बाद यह बहादराबाद के निकट मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-58 से जुड़ जाएगा। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ने वाला यह मार्ग हरिद्वार की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

अर्धकुंभ-2027 में मिलेगी बड़ी राहत

हरिद्वार में वर्ष 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होना है। इस दौरान दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। स्नान पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है।

ऐसे में नया कॉरिडोर शुरू होने से यात्रियों को एक वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इससे हरिद्वार में प्रवेश करने वाले वाहनों का दबाव कम करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा फायदा

कॉरिडोर का लाभ केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार आने वाले पर्यटकों की आवाजाही आसान होने से होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान और स्थानीय बाजारों से जुड़े कारोबारियों को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, सिडकुल क्षेत्र में मालवाहक वाहनों की आवाजाही और स्थानीय लोगों के आवागमन में भी सुविधा मिलने की संभावना है।

एनएचएआई के रुड़की खंड के परियोजना निदेशक पुनीत गर्ग के अनुसार, निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। लक्ष्य दिसंबर में कॉरिडोर को यातायात के लिए खोलने का है। इसके शुरू होने से दिल्ली और हरिद्वार के बीच यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा और यात्रियों का समय बचाने में मदद मिलेगी।

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Hill Mail

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