यह वॉकथॉन देहरादून स्थित ओएनजीसी के डॉ. बी.आर. अंबेडकर ग्राउंड में आयोजित किया गया। इसका आयोजन ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त उत्तराखंड वॉकथॉन केवल एक सामान्य आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने और प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी मिलती है। साथ ही, युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने और अपने जीवन में बेहतर विकल्प चुनने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राज्य की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। प्रदेश के विकास, सामाजिक मजबूती और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें शिक्षा, खेल, रोजगार तथा रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना जरूरी है। इसके लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं को मिलकर प्रयास करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या का प्रभाव केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होते हैं। इसलिए नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को इसके दुष्परिणामों के बारे में लगातार जानकारी देना आवश्यक है। जनभागीदारी के जरिए ही नशामुक्त समाज के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने इस पहल के आयोजन के लिए ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और आयोजकों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से देवेन्द्र सिंह बिष्ट के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे अभियान प्रदेश में सकारात्मक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों ने नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की कि वे अपने आसपास के लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें और उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के सामूहिक संकल्प को आगे बढ़ाएं।




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