निशंक ने साइडलाइन किए जाने से जुड़े सवाल पर कहा कि उन्हें आज तक यह समझ नहीं आया कि साइडलाइन होने का मतलब क्या होता है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से राजनीति में हैं और हमेशा मुख्यधारा में ही रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में दोहराया कि जब तक राजनीति में रहना होगा, वह मेन लाइन में ही रहेंगे। उनके मुताबिक, वह न तो कभी खुद को साइडलाइन मानते हैं और न ही उनकी राजनीतिक पारी पर विराम लगा है।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपती है, वह उसे निभाते हैं। उनके इस बयान को उन चर्चाओं के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिनमें उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन में भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। हालांकि, उन्होंने पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी या मतभेद को लेकर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
अंकिता भंडारी हत्याकांड पर भी रखी राय
निशंक ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर चल रही सीबीआई जांच पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले को देखने का हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है, लेकिन सामूहिक नजरिया सही होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब मामले में सीबीआई जांच चल रही है, तो इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निशंक का यह बयान जांच पूरी होने तक संयम बरतने की बात पर जोर देता है। मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही संबंधित तथ्यों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक का सफर
रमेश पोखरियाल निशंक भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह 27 जून 2009 से 10 सितंबर 2011 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। राज्य सरकार में उन्होंने चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और आयुष मंत्री की जिम्मेदारियां भी संभालीं।
वर्ष 2014 में वह हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। वर्ष 2019 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की और केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बने। मई 2019 से जुलाई 2021 तक उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया गया।
निशंक के ताजा बयान के बाद उत्तराखंड भाजपा में उनकी आगामी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो सकती हैं।




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