Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ PM के सोशल मीडिया अकाउंट्स से कश्मीर की आरिफा ने बताई अपनी दास्तां, आत्मनिर्भरता का संदेश
उत्तराखंड न्यूज़

PM के सोशल मीडिया अकाउंट्स से कश्मीर की आरिफा ने बताई अपनी दास्तां, आत्मनिर्भरता का संदेश

arifa from kashmir-takes on-pm modis social media accounts

हिल मेल ब्यूरो, नई दिल्ली

पीएम नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल पर अगली प्रेरक कहानी साझा की है कश्मीर की रहने वाली आरिफा ने। श्रीनगर की आरिफा ने क्राफ्ट मैनेजमेंट किया है। उन्होंने वीडियो शेयर कर बताया कि कैसे कभी कश्मीर की शान रही दस्तकारी दम तोड़ रही थी। यह देख उन्होंने ठान लिया कि उन्हें कश्मीर में रहकर इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए काम करना है।

आरिफा ने नमदा दस्तकारी को जिंदा करने की अपनी पहल के बारे में बताते हुए युवाओं से नौकरी ढूंढने की जगह नौकरी देने के लिए उद्यमी बनने की अपील की। दरअसल, पढ़ाई के समय उन्हें फील्ड विजिट के लिए कारीगरों के घरों में ले जाया जाता था। तब उन्हें पता चला कि आज कारीगरों की हालत ऐसी क्यों है और दस्तकारी क्यों दम तोड़ रही है। उन्होंने बताया कि कारीगरों को उनके मेहनत की उचित मजदूरी नहीं मिलती थी। इससे दस्तकारी को गहरा धक्का लगा।

https://www.facebook.com/narendramodi/videos/2505096082933506/

 

उन्होंने बताया कि नमदा की महिला कारीगरों को हर दिन 50 रुपये ही मिलते थे। विदेशों में इसका निर्यात भी गिरकर 2% पर पहुंच गया। आरिफा ने महिलाओं का एक समूह बनाया और नमदा को रिवाइव करने में जुट गईं। वह सात वर्षों से नमदा का अच्छा खासा बिजनस खड़ा कर चुकी हैं।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि परंपरा के साथ जब आधुनिकता मिल जाती है तो चमत्कार हो सकता है। मैंने अपने काम में इसका अनुभव किया है। आरिफा ने लिखा कि पीएम मोदी की इस पहल से उनका हौसला बढ़ा है और इससे क्राफ्ट और कश्मीर के कारीगरों की बेहतरी के लिए कड़ी मेहनत करने में उन्हें मदद मिलेगी।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स महिलाओं को सौंप दिए हैं। उन्होंने देशभर से सात प्रेरणदायी महिलाओं का चयन किया है जो बारी-बारी से ट्वीट कर रही हैं। #SheInspiresUs के साथ शेयर होने वाली कहानिंया सुबह से ही ट्रेंडिंग में हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...