पुलिस, यह शब्द सुनते ही हमारे जेहन में वर्दी में एक ऐसे जवान की तस्वीर उभरती है, जिसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और समाज में अपराध को रोकने जैसे कामों के लिए जाना जाता है। हालांकि पुलिस का एक दूसरा रूप भी है, जिस पर हमारी नजर कम ही जाती है। कोरोना वायरस के चलते पैदा हुए इस संकट में पुलिस ‘देवदूत’ के रूप में गरीबों और बेसहारा लोगों का सहारा बन रही है। जी हां, पुलिस के जवान न सिर्फ लोगों को सामाजिक दूरी का पाठ पढ़ा रहे हैं बल्कि इस लॉकडाउन में जिन लोगों पर रोजी-रोटी का संकट आया है, उन्हें खाना भी खिला रहे हैं।
बात देहरादून के थाना नेहरू कॉलोनी पुलिस की करते हैं। यहां पुलिस के जवानों ने एक नई पहल की है। ‘एक सिपाही, एक परिवार’ नाम की मुहिम के तहत गरीबों की लॉकडाउन तक जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया गया है। पुलिसकर्मियों के इस प्रयास की खूब तारीफ हो रही है।
आपको बता दें कि वर्तमान में लॉकडाउन के तहत दून पुलिस देहरादून में गरीब, असहाय, मजदूर एवं बाहर के ऐसे लोग, जिनके पास आजकल रोजगार न होने के कारण खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो रही है, उनका सहारा बन रही है। पुलिस उपमहानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा हर ऐसे व्यक्ति की, जो लॉकडाउन के कारण समस्या में है और पुलिस से मदद की आस लगाए बैठे हैं, हरसंभव मदद करने को कहा गया है।
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नेहरू कॉलोनी पुलिस के सभी अधिकारी/ कर्मचारी द्वारा आपस में एक सहमति बनाई गई कि वे सभी अपने-अपने एरिया के एक- एक परिवार को अपना परिवार मानकर लॉकडाउन तक भोजन, राशन की जिम्मेदारी लेंगे। इस प्रकार से चल पड़ी एक सिपाही, एक परिवार की मुहिम। इसके तहत 98 कांस्टेबल द्वारा कुल 98 परिवार (प्रत्येक को एक परिवार) तथा प्रत्येक एसआई ने 2 परिवार को अपना परिवार मानकर उनको भोजन, राशन देने की जिम्मेदारी ली है।
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थाना नेहरू कॉलोनी के 113 पुलिस कर्मियों द्वारा 124 परिवारों को अपना परिवार मानकर लॉकडाउन तक उनको राशन, भोजन, दवाई आदि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली गयी है।



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