नैनीताल में अयारपाटा स्थित नेवल आफिस के बगल में रहने वाले बालक देवेन्द्र को नेवी अधिकारियों की सफेद चमचमाती वर्दी बहुत आकर्षित करती थी। इसी से उन्हें नेवी में जाने की प्रेरणा मिली। हालांकि तब देवेन्द्र ने भी शायद ही सोचा हो कि एक दिन
नैनीताल में अयारपाटा स्थित नेवल आफिस के बगल में रहने वाले बालक देवेन्द्र को नेवी अधिकारियों की सफेद चमचमाती वर्दी बहुत आकर्षित करती थी। इसी से उन्हें नेवी में जाने की प्रेरणा मिली। हालांकि तब देवेन्द्र ने भी शायद ही सोचा हो कि एक दिन लोग उन्हें भारतीय नौसेना के मुखिया के रूप में जानेंगे। एडमिरल जोशी 31 अगस्त 2012 को नौसेना प्रमुख का चार्ज संभालेंगे। उनका कहना है कि उनकी दिली इच्छा है कि नौसेना में उत्तराखंड के जवान ऊंचे मुकाम पर पहुंचें। उनके पिता हीरा बल्लभ जोशी मुख्य वन संरक्षक रह चुके हैं और मां हंसा जोशी हैं। उनकी पत्नी चित्रा जोशी मशहूर चित्रकार हैं। डीके जोशी की दो बेटियां भी हैं।
एडमिरल जोशी ने राजकीय इंटर कालेज नैनीताल से 12वीं की पढ़ाई की थी। 1971 के दौरान वह मल्लीताल स्थित अयारपाटा में थैनेट विला व पोप्स विला में रहे थे। नेवी एनसीसी आफिस के निकट घर होने के कारण वह अधिकारियों को सफेद चमचमाती वर्दी में देखते थे। यहीं से उनके मन में भी उस वर्दी को पहनने का ख्वाब जगा। उनका विद्यालय जीआईसी तब डीएसबी कैंपस के बाटनी विभाग में होता था। उनके अधिकतर मित्र डाक्टर या इंजीनियर बनना चाहते थे। पर वे तो नेवी में जाने की ठान चुके थे।
एडमिरल जोशी ने बताया कि आज भी फुरसत मिलते ही वह सीधे नैनीताल आने की सोचते हैं। यहां पुरानी यादें ताजा करने के लिए उन्होंने तल्लीताल फांसी गधेरे से लेकर डीएसबी कैंपस व अयारपाटा क्षेत्र का पैदल भ्रमण करते हैं। अधिकतर जवान मैदानी इलाकों से होते थे मगर अब उत्तराखंड के जवानों की भी नौसेना में अधिक संख्या में भागीदारी हो रही है। अब लोगों को उम्मीद है कि अपने कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड के जवानों के लिए अतिरिक्त भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से उत्तराखंड वासियों को तोहफा देंगे।
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के सरकारी स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र देवेंद्र कुमार जोशी ने जब अपने मध्यवर्गीय परिवार और शिक्षकों को सेना में जाने के अपने सपने के बारे में बताया होगा, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन वह देश की नौसेना के प्रमुख बनेंगे। अपनी लगन और दृढ़ निश्चय के बल पर देवेंद्र कुमार जोशी उर्फ डीके जोशी ने सेना में शामिल होकर देश सेवा का सपना तो पूरा किया ही, अब नौसेना की कमान संभालकर अपने गृहराज्य उत्तराखंड के ऐसे दूसरे व्यक्ति बन जाएंगे, जो सेना प्रमुख के ऊंचे ओहदे तक पहुंचा हो। अल्मोड़ा और नैनीताल में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले जोशी जब दिल्ली के हंसराज कॉलेज में पढ़ाई कर रहे, तभी उनका चयन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए हो गया था। वहां से निकलने के बाद वह नौसेना की सेवा में शामिल हो गए।
वह प्रतिष्ठित अमेरिकी नेवल वार कॉलेज और मुंबई कॉलेज ऑफ वारफेयर से ग्रेजुएट हैं। अपने 38 वर्ष के लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया। पिछले वर्ष मई से वह मुंबई स्थित नौसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख हैं, लेकिन इससे पहले वह नौसेना के डिप्टी चीफ, अंडमान एवं निकोबार द्वीप स्थित रणीतिक कमान एवं इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ कमान के प्रमुख की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उच्च तकनीक से लैस युद्ध विरोधी पनडुब्बियों के विशेषज्ञ वॉयस एडमिरल डीके जोशी लड़ाकू युद्धपोत आईएनएस कुठार, विध्वंसक युद्धपोत आईएनएस रणवीर और विमानवाहक पोत विराट की कमान संभाल चुके हैं। इतना ही नहीं, वह सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग में रक्षा सलाहकार भी रह चुके हैं। उनके सीने पर अतिविशिष्ट पदक, परम विशिष्ट पदक, युद्ध सेवा पदक, नौसेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक जैसे कई तमगे सुशोभित हैं। 58 वर्षीय डीके जोशी ऐसे वक्त में भारतीय नौसेना की कमान संभालने जा रहे हैं, जब दो विमानवाहक पोत के अलावा कई युद्धपोत, पनडुब्बियां और लंबी दूरी के निगरानी विमान शामिल करके नौसेना का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
मनजीत नेगी







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