लॉकडाउन दो हफ्ते के लिए बढ़ गया है पर इसके साथ ही सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों, छात्रों और अन्य लोगों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की अनुमति भी दे दी है। कोरोना संकट के चलते देश के कोने-कोने में फंसे लोग अब अपने घर (uttarakhand migration) जा सकते हैं। उत्तराखंड सरकार ने दूसरे राज्यों से अपने लोगों को लाने और प्रदेश में फंसे दूसरे राज्यों को वापस भेजने की प्रक्रिया (registration of migrant workers) तेज कर दी है।
पहले इन दो राज्यों से प्रवासी श्रमिकों को लाया जाएगा
बताया जा रहा है कि पहले चरण में राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फंसे उत्तराखंडियों को यहां लाया जाएगा और यहां फंसे इन राज्यों के लोगों को अपने राज्यों में भेजा जाएगा। इसके बाद दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब समेत अन्य राज्यों से लोगों को लाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार ने इस व्यवस्था को ठीक तरह से संचालित करने के लिए सचिव (परिवहन) शैलेश बगोली और आईजी संजय गुंज्याल को नोडल अफसर बनाया है। इसके साथ डीआईजी रिधिम अग्रवाल को एडिशनल सीईओ बनाया गया है।
उत्तराखंड से बाहर जाने के लिए जो लोग (migrant workers) कंट्रोल रूम में फोन कर रहे हैं, उनका ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है। इसके बाद यह देखा जाएगा कि उन्हें बस से भेजा जा सकता है या फिर स्पेशल ट्रेन का अनुरोध करना होगा। अगर संख्या अधिक होगी तो ट्रेन से ले जाने की अनुमति के लिए सरकार को अवगत कराया जाएगा। करीब 30 हजार लोगों के आवेदन अब तक प्राप्त हो गए हैं।
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इतना ही नहीं, प्रदेश से नेपाल जाने के लिए 459, अन्य राज्यों से उत्तराखंड आने के लिए 127 लोगों ने आवेदन किया है। उनके लिए वाहनों की व्यवस्था के लिए कार्यवाही की जा रही है।
उत्तराखंड से जाने वाले प्रवासी मजदूरों की जानकारी
सरकार ने उत्तराखंड से जाने वाले श्रमिकों की भी जानकारी दी है। इनमें उत्तर प्रदेश के 15243, बिहार के 13048, झारखंड के 435, पश्चिम बंगाल के 220, मध्य प्रदेश के 193, छतीसगढ़ के 172, जम्मू-कश्मीर के 242, हरियाणा के 94, राजस्थान के 86, हिमाचल प्रदेश के 78, पंजाब के 47, दिल्ली के 54, महाराष्ट्र के 28, असम के 21, चंडीगढ़ के 14, ओडिशा के 5, गुजरात के 4, कर्नाटक के 2 और तेलंगाना 1 श्रमिक शामिल हैं।


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