‘हिल मेल’ की पहल ई-रैबार में रविवार को उत्तराखंड के पारंपरिक गीत-संगीत विधा की तीन जानीमानी हस्तियां शामिल हुईं। प्रख्यात जागर गायिका पद्मश्री बसंती देवी बिष्ट, प्रख्यात जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण और प्रख्यात लोक गायिका मीना राणा इस मंच से जुड़ीं। प्रीतम भरतवाण और मीना राणा ने भजन, लोकगीत सुनाए और पहाड़ की संस्कृति के संरक्षण को लेकर अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम का संचालन मशहूर आरजे काव्य ने किया।
जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने कहा कि लॉकडाउन का फैसला बिल्कुल सही है और इससे कोरोना वायरस को सीमित करने में काफी हद तक कामयाबी मिली है। उन्होंने कहा कि भाषा को बचाने के लिए उसे स्कूलों में सिखाया जाना आवश्यक है क्योंकि केवल बोलचाल से उतना बढ़ावा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि भाषा के उत्थान के लिए दोनों चीजों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि हमें बीज और खेत संरक्षित करना होगा तभी फसल उगेगी।
जागर सम्राट ने कहा कि बोलचाल में भाषा हो, यह तो होना ही चाहिए। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में भी इसे शामिल करना चाहिए। पाठ्यक्रमों में भाषा आएगी तभी संरक्षण हो पाएगा। कार्यक्रम में प्रख्यात जागर गायिका बसंती देवी बिष्ट भी जुड़ी थीं पर नेटवर्क संबंधी परेशानी के चलते उनसे विस्तृत संवाद नहीं हो सका।
प्रख्यात लोकगायिका मीना राणा ने स्कूल में बच्चों के लिए एक घंटे गीत-संगीत की शिक्षा देने पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज से 10 साल पहले जन्मे बच्चों को उत्तराखंड के गीत-संगीत, संस्कृति, भाषा की समझ कम है। इस दिशा में गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। हमें हर हाल में अपने बच्चों के अपनी भाषा का बीज रोपना होगा।
पूरा कार्यक्रम देखने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें….


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