दुनिया ने भी उत्तराखंड के जांबाजों के अदम्य साहस को सलाम किया है। पर्वतारोहण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले भारतीय सेना के कर्नल अजय कोठियाल के साहस को दुनियाभर के करोड़ों लोगों ने डिस्कवरी चैनल पर देखा।
गढ़वाल राइफल्स की चैथी बटालियन के कमान अधिकारी कर्नल कोठियाल देहरादून के वसंत विहार के रहने वाले हैं। इस समय वह सेना मुख्यालय दिल्ली में तैनात हैं।
डिस्कवरी चैनल ने कर्नल कोठियाल के नेतृत्व में माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने वाले भारतीय सैनिकों के साहस व रोमांच का प्रसारण किया। यह प्रोग्राम 25 और 26 जनवरी को रात्रि नौ बजे से दस बजे तक प्रसारित किया गया।
कर्नल कोठियाल के नेतृत्व में इंडियन आर्मी ओमेन एक्सपीडिशन दल ने पिछले साल 26 मई को सर्वोच्च पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण किया था। अभियान दल में भारतीय सेना की सात महिला अफसर भी शामिल थीं।
माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए भारतीय सेना की ओर से पहली बार महिला अफसरों के लिए पर्वतारोहण अभियान चलाया गया था। देहरादून की रहने वाली कैप्टन नम्रता राठौर भी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली सेना की सात महिला अफसरों में शामिल रही।
खास बात यह कि दून निवासी कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में भारतीय सेना के जिन 17 जांबाज पर्वतारोहियों (महिला व पुरुष) ने दुनिया के सर्वोच्च पर्वत शिखर पर सफल आरोहण किया, उनमें अकेले उत्तराखंड के ही सात जांबाज शामिल थे।
कुमाऊं रेजीमेंट के सूबेदार राजेन्द्र दलाल ने बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर्वत चोटी पर आरोहण करने का अनोखा रिकार्ड बनाया है। जबकि सूबेदार तेजपाल दूसरी बार एवरेस्ट फतह करने में कामयाब रहे। मूलतः कोटद्वार निवासी सूबेदार प्रभुदयाल बिष्ट तथा रायवाला निवासी हवलदार प्रवीन थापा व हवलदार सीबी थापा भी पर्वतारोही अभियान दल में शामिल रहे और माउंट एवरेस्ट को फतह किया।
तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर फतह करने वाले भारतीय थलसेना के महिला पर्वतारोही दल को मानेकशाॅ सेन्टर में 3 जुलाई को बधाईं दी थी। यहां आयोजित एक समारोह में इस दल को बधाईं देते हुए प्रतिभा ने कहा था, ‘‘भारतीय थलसेना ने इतने साहसिक काम को पूरी सफलता से अंजाम देने में अपने एक महिला दल को लगा कर एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है’’।
तत्कालीन राष्ट्रपति ने सूबेदार राजेन्द्र दलाल बारे में कहा था, ‘‘अतिरिक्त ऑक्सीजन आपूर्ति के बिना एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय पवर्तारोही सूबेदार राजेंद्र सिंह जलाल को मेरी ओर से विशेष बधाईं’’।
पहली बार इस रास्ते से सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोग्रे ने चढ़ाई कर एवरेस्ट फतह की थी।
इस रोमांचक व साहसिक पर्वतारोहण अभियान को अगले तीन साल में 52 बार दुनियाभर के लोग देख सकेंगे। पर्वतारोहण अभियान को कैमरे में कैद करने के लिए डिस्कवरी के तीन सदस्य भी अभियान दल में शामिल थे।
हिलमेल ब्यूरो


Leave a comment