Home बकीबात बकीबातः खौफ में पंजे वाली पार्टी के नेता, सुपर बॉस बनकर न आ जाए कोई…
बकीबात

बकीबातः खौफ में पंजे वाली पार्टी के नेता, सुपर बॉस बनकर न आ जाए कोई…

उत्तराखंड में क्या है सियासी गलियारों की कानाफूसी, क्या हो रहा है सरकारी महकमों में..। टी. हरीश के खास कॉलम 'बकीबात' में जानिये...ताजा अपडेट।

  • टी. हरीश

खौफ में पंजे वाली पार्टी के नेता, सुपर बॉस बनकर न आ जाए कोई…

ऐसे लगता है कि उत्तराखंड में सत्ताधारी भाजपा के लिए पूरा मैदान खाली है, क्योंकि राज्य में विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं है। राज्य सरकार के सामने विपक्ष पूरी तरह नतमस्तक हो गया है। राज्य में जनता से जुड़े कई मुद्दे हैं लेकिन किसी दमदार नेता की कमी से विपक्ष सरकार के सामने इन मुद्दों को नहीं उठा पा रहा है। लिहाजा माना रहा है कि पंजे वाली पार्टीं आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ किसी मजबूत नेता को सामने ला सकती है। हालांकि पार्टी के मजबूत नेता दिल्ली चले गए हैं, लेकिन आलाकमान का क्या, कभी भी कोई फैसला ले सकता है। लिहाजा पार्टी के नेताओं में इस बात का खौफ है कि बड़ी मुश्किल से तो नेताजी को दिल्ली भेजा था। लेकिन कहीं ऐसा न हो जाए कि आने वाले दिनों में वह सुपर बॉस बनकर लौट आएं।

कांग्रेस के छपास प्रतापी

उत्तराखंड में कांग्रेस के एक नेता है, जिनसे राज्य के ज्यादातर पत्रकार परेशान हैं, क्योंकि इनके छपास रोग के कारण अकसर ये पार्टी को मुश्किल में डाल देते हैं। इनके आइडिया के तो क्या कहने। कभी कांग्रेस सरकार में राज्यमंत्री रहे इन प्रतापी को बस एक छोटा से मुद्दा मिलना चाहिए। बस फिर क्या पूरी कहानी बनाकर ये पत्रकारों को फोन कर ब्रेकिंग देते हैं और कहते हैं ये खबर सिर्फ आपको बता रहा हूं। लेकिन राज्य का शायद कोई ही पत्रकार हो जिसे ये प्रतापी छपास के रोगी फोन न करते हों। इनका छपास का रोग ऐसा है कि राज्य सरकार के हर बयान पर ये प्रेस रिलीज तैयार कर लेते हैं और कोरोना संकट में व्हाट्सअप और मेल के जरिये दिल्ली, देहरादून से जारी कर देते हैं। फिलहाल इनसे राज्य के पत्रकार भी परेशान हैं।

कोरोना संकट में कैसे चलेगी चाय पानी

पिछले दिनों राज्य सरकार ने कोरोना संकट को देखते हए फैसला किया कि सचिवालय में बाहरी लोगों का प्रवेश बंद किया जाए। सरकार ने तो फरमान जारी कर दिया है। लेकिन सरकार के इस फरमान से सबसे ज्यादा दिक्कत सचिवालय के कर्मचारियों को हो गई है। खासतौर से निचले तबके के कर्मचारियों को। जिनके एक सलाम से बाहर से आने वाले साहब लोग चाय पानी की व्यवस्था कर देते हैं। लेकिन सचिवालय में बाहरी लोगों का प्रवेश बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं का हो रहा है। पिछले दिनों ही एक बड़े साहब के मुंह लगे कर्मचारी से किसी ने पूछ ही लिया कैसा चल रहा तो उन्होंने बड़े दुख के साथ कहा, कोरोना संकट में चाय पानी नहीं चल रही है।

कोरोना ने चलाई विभागों पर कैंची

पिछले दिनों सरकार ने राज्य में तैनात अफसर के विभागों पर कैंची चला दी। अफसरों को राज्य के मुखिया का करीबी माना जाता है और उनके पास जिम्मेदारियां भी काफी थीं। नौकरशाही में कहा जाता है कि जितने ज्यादा विभाग होते हैं, उतना ही अफसर को ताकतवर माना जाता है। अगर विभागों में कटौती हो जाए तो कई तरह के रास्ते बंद हो जाते हैं और चर्चाएं भी होती हैं कि साहब का रूतबा कम हो गया है। लेकिन अफसर अब क्या कहें, मुखिया ने तो रूतबा कम कर ही दिया। लिहाजा अब साहब कह रहे हैं कि कोरोना संकट ने कैंची चलाई है इसलिए विभागों की जिम्मेदारी कम हुई है।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

बकी बातः त्रिवेंद्र हुए मजबूत, कैबिनेट विस्तार में उनकी ही पसंद को मिलेगी तरजीह

उत्तराखंड में क्या है सियासी गलियारों की कानाफूसी, क्या हो रहा है...

अनिल बलूनी, प्रियंका गांधी… चाय-पानी, झंगोरे की खीर और कचमोली की एंट्री!

प्रियंका गांधी सरकारी आवास खाली कर रही हैं। एसपीजी सुरक्षा वापस लिए...