दोहरी पेंशन का बड़ा घोटाला: 653 अपात्रों से 16.8 करोड़ की वसूली तय, अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

दोहरी पेंशन का बड़ा घोटाला: 653 अपात्रों से 16.8 करोड़ की वसूली तय, अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

उत्तराखंड में समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य में 653 लोग फर्जी आय प्रमाणपत्रों के जरिए दोहरी पेंशन का लाभ ले रहे थे। इनमें से कई लाभार्थी पहले से ही सरकारी पेंशन प्राप्त कर रहे थे, इसके बावजूद उन्होंने वृद्धावस्था या विधवा पेंशन का भी अनुचित लाभ उठाया।

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में 1377 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई। इसके बाद शासन ने एक विशेष जांच कमेटी गठित की, जिसने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने गलत शपथ पत्र और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पेंशन प्राप्त की।

रिपोर्ट के अनुसार, इन अपात्र लाभार्थियों से लगभग 16.8 करोड़ रुपये की रिकवरी की सिफारिश की गई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, यहां तक कि मुकदमा दर्ज करने की भी संस्तुति की गई है। इस मामले की गूंज अब तहसील स्तर से लेकर शासन के उच्च स्तर तक सुनाई दे रही है।

जांच में प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर हुई है। बिना स्थलीय सत्यापन के आय प्रमाणपत्र जारी करने वाले तहसील स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

समाज कल्याण विभाग ने पहले ही संदिग्ध खातों पर रोक लगा दी थी और लाभार्थियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। आठ अप्रैल तक 369 लोगों ने अपने जवाब प्रस्तुत किए, जिनमें अधिकांश ने दावा किया कि उन्हें दोहरी पेंशन मिलने की जानकारी नहीं थी और यह “अनजाने में हुई गलती” थी। हालांकि, जांच एजेंसियां इस दावे को पूरी तरह स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं।

इस घोटाले में 565 लोग राज्य आंदोलनकारी आश्रित कोटे से जुड़े पाए गए हैं, जिनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। इससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है, क्योंकि यह उन योजनाओं से जुड़ा है, जो समाज के कमजोर वर्गों के लिए बनाई गई हैं।

अपर सचिव समाज कल्याण प्रकाश चंद ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट शासन को प्राप्त हो चुकी है और फिलहाल उच्च स्तर पर इसका परीक्षण चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजी जाएगी, जो इस मामले में अंतिम निर्णय लेंगे।

समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी के अनुसार, 653 ऐसे लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने चार हजार रुपये प्रति माह से अधिक आय होने के बावजूद गलत शपथ पत्र देकर योजनाओं का लाभ लिया। उन्होंने बताया कि 16.89 करोड़ रुपये की रिकवरी और मुकदमे की सिफारिश भी की गई है।

यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निगरानी तंत्र में सुधार की कितनी आवश्यकता है। आने वाले दिनों में इस घोटाले पर सरकार की कार्रवाई और फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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