Friday , 4 September 2026
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देहरादून का लक्ष्मीपुर गांव कैसे बना उत्तराखंड की पहली स्मार्ट पंचायत! इनोवेटिव पहल की दिलचस्प कहानी

देहरादून के सहसपुर के लक्ष्मीपुर गांव की कहानी शुरू होती है रूपा देवी के बतौर ग्राम प्रधान चुने जाने से। यह इलाका 95 प्रतिशत मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। फिर भी यहां के लोगों ने विकास की चाह को प्राथमिकता देते हुए रूपा देवी को चुना। आज उनका यह फैसला जमीन पर फलीभूत हो रहा है। रूपा देवी ने स्मार्ट गांव की परिकल्पना को साकार करने के लिए अपने देवर नीरज कुमार को अपना सलाहकार बनाया और इसके बाद लक्ष्मीपुर में इनोवेशन की झड़ी लग गई।

यहां नए-नए क्षेत्रों में प्रयोग हो रहे हैं तो वहीं मूलभूत जरूरतों को लेकर भी काम किया गया है। गांव में लगभग सभी सड़कें पक्की हो चुकी हैं। इससे बरसात में किसी तरह की समस्या पेश नहीं आती।

गांव से लोगों का शहरों की ओर पलायन जब शुरू हुआ था तो शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ-साथ बिजली की आपूर्ति को भी एक बड़ा कारण माना जाता था। लेकिन लक्ष्मीपुर इस मामले में आत्मनिर्भर बन रहा है। जी हां, यहां पानी के लिए लगे पंपिंग सिस्टम भी सौर ऊर्जा से काम करते हैं। ग्राम पंचायत में एक अलग क्लिनिक है, जहां गांववाले कभी भी जाकर अपना इलाज करा सकते हैं। अब काम के बारे में भी जान लीजिए। इस गांव में मोती की खेती यानी सीप फॉर्मिंग भी की जा रही है।

कोरोना काल में मजबूरन बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह ग्राम पंचायत पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। वर्चुअल कॉफ्रेंस रूम बच्चों के लिए मददगार साबित हो रहा है।

ग्राम प्रधान रूपा देवी कहती हैं, हमारी कोशिश एकीकृत आयुष ग्राम की है। पिछले कुछ समय से सहसपुर में जैविक खेती, बागवानी और पशुपालन के क्षेत्र में नया करने की कवायद चल रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को इन क्षेत्रों में स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। नीरज कुमार बताते हैं कि हमने गांव में विकास का एक रोडमैप तैयार किया है, यह समग्र विकास की अवधारणा पर बना है। यहां एरोमैटिक फॉर्मिंग की योजना बनाई गई है। गुलाब, जिरेनियम, रतनजोत जैसे फूलों की व्यावसायिक खेती काफी लाभदायक होती है। इसके अलावा गांव में एक आरोग्य केंद्र स्थापित करने की कवायद चल रही है। गांव में देशी नस्ल की गाय के दूध के व्यावसायिक इस्तेमाल का प्रशिक्षण देने के लिए वैदिक डेयरी भी बनाने के प्रयास चल रहे हैं। बकरी पालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन को लेकर हम एक व्यापक योजना पर काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, गांव में ऑनलाइन कोचिंग के लिए जो प्लान है, उसके तहत 50 योग्य छात्रों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग दी जाएगी। इसके अलावा बैंकिंग और रेलवे जैसे क्षेत्रों में नौकरी के लिए 50 योग्य छात्रों को परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी।

ई-करियर काउंसलिंग की भी व्यवस्था होगी। कक्षा 10 के छात्रों को आगे अपना भविष्य बनाने के लिए स्ट्रीम का सिलेक्शन करना होता है जो एक अहम पड़ाव है। ऐसे में ग्राम पंचायत की ओर से गांव में ही बच्चों को काउंसलिंग की सुविधा दी जा रही है। एसटीईएण शिक्षा के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी है। इसके साथ ही सरकारी और प्राइवेट क्षेत्रों में नौकरी के लिए छात्रों को सही गाइडेंस की भी व्यवस्था की जा रही है। गांव के बच्चों को बिना दूर गए वोकेशनल ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। यहीं पर कंप्यूटर की सामान्य जानकारी माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड, प्रजेटेंशन, एक्सल की समझ विकसित की जाएगी।

गांव के लोगों का खासतौर पर महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर हो, इसकी पूरी व्यवस्था की जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि सेहत और साफ-सफाई को लेकर गांव की महिलाओं में जागरूकता की कमी होती है। इसके लिए एक प्रोजेक्ट के तहत लड़कियों को माहवारी हाइजीन के बारे में जानकारी दी जाएगी। इतना ही नहीं, लड़कियों और महिलाओं को कहीं दूर न जाना पड़े, इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उच्च प्राथमिक विद्यालय और महिला हॉस्टलों जैसी अन्य जगहों पर वेंडिंग मशीनें लगाई जाएंगी जिससे सैनिटरी नैपकीन की कमी न हो और लड़कियां बिना किसी अड़चन के आसानी से ले सकें।

यह एक अहम विषय है, जिसके बारे में गांव के लोग कम जानकारी रखते हैं। हालांकि अब शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ ही जागरूकता भी बढ़ रही है। बैंकिंग सेवाओं और उनके संसाधनों के वित्तीय प्रबंधन से संबंधित लोगों को ज्ञान की कमी न हो इसके लिए भी ग्राम पंचायत में प्लान है। इसके लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किया है। हर हफ्ते 3 सत्र रखे जाएंगे और हर सत्र एक घंटे का है।

खेती-किसानी में कई काम ऐसे होते हैं जिसमें बैंकों से लोन लेना पड़ता है या खेती को लेकर और भी कई तरह के फैसले लेने पड़ते हैं। इसके बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए किसान क्लब का गठन करने का प्रस्ताव है। हर गांव में यह किसान क्लब होगा। नाबार्ड की ओर से सालाना हर किसान क्लब को 10 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। एक निश्चित इलाके में कुल 50 किसान क्लब को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां किसान साथ बैठकर अपनी समस्याएं रख सकते हैं और उन्हें जागरूक किया जाएगा।

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Hill Mail

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