उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। इसमें उन सभी जिलों के जिलाधिकारी उपस्थित थे, जहां से ये रेललाइन गुजरेगी। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के साथ समन्वय बनाकर उन्हें हर तरह की प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएं।

उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिये कि परियोजना से संबंधित बचे हुए कामों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए। इसके साथ ही सभी काम में गुणवत्ता, गति एवं पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्य सचिव ने आरवीएनएल के अधिकारियों से कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा।

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मुख्य सचिव ने कहा कि जल संस्थान जल्द से जल्द पाइपलाइन शिफ्टिंग का कार्य पूर्ण कर लें। साथ ही उसमें आ रही समस्याओं से समय-समय पर शासन को अवगत कराया जाए ताकि समस्याओं का निराकरण हो। रेल लाइन से संबंधित भूमि अधिग्रहण के कार्य के पश्चात् भूमि मुआवजा संबंधी कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाएं। टनल निर्माण एवं अन्य निर्माण से होने वाले मलबा के निस्तारण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को शेष निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने निर्देश दिए कि रेलवे लाइन में बनने वाली सुरंगों खासकर वन क्षेत्र में आने वाली टनलों में सेंसरयुक्त गेट लगाए जाएं जिससे जंगली जानवरों के टनल में जाने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सके। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 के 03 स्थानों ब्यासी डायवर्जन, नरकोटा डायवर्जन व सुमेरपुर डायवर्जन के प्रकरणों पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आनंद वर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जय राज, सचिव आरके सुधांशु, नितेश कुमार झा, शैलेश बगोली, सुशील कुमार, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, निदेशक पिटकुल संजय मित्तल, रेल विकास निगम लि. के एडिशनल जनरल मैनेजर विजय डंगवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेंद्र कुमार आदि उपस्थित थे।


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