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केदारनाथ में उतरा दुनिया का सबसे बड़ा मालवाहक हेलीकॉप्टर चिनूक, वायुसेना के क्षतिग्रस्त एमआई-17 को ले गया

डीडीएमए और लोक निर्माण विभाग ने चिनूक की लैडिंग के लिए केदारनाथ में पहले से बने 100 मीटर लंबे और 50 मीटर चौड़े हेलीपैड में कुछ बदलाव किए। 100-50 मीटर के हेलीपैड को पूरी तरह खुला रखा गया है ताकि बड़े हेलीकॉप्टर की आसानी से लैडिंग की जा सके।

भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा मालवाहक हेलीकॉप्टर चिनूक ने शनिवार को केदारनाथ में सफल लैंडिंग की। इसके साथ ही केदारपुरी में चल रहे निर्माण कार्यों के लिए बहुत भारी मशीनों को पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। फिलहाल वायुसेना चिनूक की मदद से केदारनाथ में 2018 में हादसे का शिकार हुए अपने एमआई-17 हेलीकॉप्टर को ले गई।

 

अप्रैल 2018 में केदारनाथ में वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर लैंडिंग के वक्त दुर्घटनागस्त हो गया। हेलीकॉप्टर निर्माण साम्रगी लेकर केदारनाथ के लिए उड़ा था। इस हेलीकॉप्टर को मंदिर के पीछे बने हेलीपैड पर उतरना था, लैंडिंग के वक्त हेलीकॉप्टर अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गया। चिनूक के भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनने से पहले तक एमआई-17 को यहां से निकालना एक चुनौती बना हुआ था। अब चिनूक की केदारनाथ में सफल लैंडिंग के बाद वायुसेना अपने क्षतिग्रस्त हेलीकॉप्टर को यहां से ले गई।

 

केदारनाथ धाम में आपदा के बाद नेहरु पर्वातारोहण संस्थान (NIM) द्वारा शुरू किए गए पुनर्निर्माण कार्य के लिए भारी मशीनें उतारी गईं थीं। इसमें एयरफोर्स के एमआई 17 और एमआई 26 का इस्तेमाल किया गया। अब केदारनाथ में चल रहे निर्माण कार्यो के लिए बड़ी मशीनों का उतारा जाना है। इसके लिए चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद ली जाएगी। इसके लिए केदारनाथ में बने हेलीपैड पर कुछ बदलाव किए गए हैं। सामान्य तौर पर जहां हेलीकॉप्टर लैंड करते हैं, वहां से जीएमवीएन के सभी स्ट्रक्चर हटा दिए गए हैं।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और लोक निर्माण विभाग ने चिनूक की लैडिंग के लिए केदारनाथ में पहले से बने 100 मीटर लंबे और 50 मीटर चौड़े हेलीपैड में कुछ बदलाव किए। 100-50 मीटर के हेलीपैड को पूरी तरह खुला रखा गया है ताकि बड़े हेलीकॉप्टर की आसानी से लैडिंग की जा सके। हेलीपैड के पास ही बड़ी मशीनों को उतारने के लिए 50-30 मीटर का कच्चा पैच भी बनाया गया।

 

देखें वीडियो

 

चिनूक एक मल्टीपर्पस वर्टिकल लिफ्ट हेलीकॉप्टर है जिसका उपयोग मुख्य रूप से सैनिकों, तोपखाने, उपकरण और ईंधन के परिवहन के लिए किया जाता है। भारत ने सितंबर 2015 में भारतीय वायु सेना के लिए 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए बोइंग के साथ कई अरब डॉलर के एक डील को आखिरी रूप दिया था।

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Hill Mail

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