Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 230

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home1/hillmail/public_html/wp-content/themes/pressroom/shortcodes/single-post.php on line 364

बग्वाल में इस साल फल-फूल बरसे

देवीधूरा में वाराही देवी मंदिर के प्रांगण में प्रतिवर्ष रक्षाबन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को पत्थरों की वर्षा का एक विशाल मेला लगता है। मेले की ऐतिहासिकता कितनी प्राचीन है इस विषय में मत-मतान्तर हैं। लेकिन आम सहमति है कि नह बलि की परम्परा

bagwal1देवीधूरा में वाराही देवी मंदिर के प्रांगण में प्रतिवर्ष रक्षाबन्धन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को पत्थरों की वर्षा का एक विशाल मेला लगता है। मेले की ऐतिहासिकता कितनी प्राचीन है इस विषय में मत-मतान्तर हैं। लेकिन आम सहमति है कि नह बलि की परम्परा के अवशेष के रुप में ही बग्वाल का आयोजन होता है। लोक मान्यता है कि किसी समय देवीधूरा के सघन बन में बावन हजार वीर और चैंसठ योगनियों के आतंक से मुक्ति देकर स्थानीय जन से प्रतिफल के रुप में नर बलि की मांग की, जिसके लिए निश्चित किया गया कि पत्थरों की मार से एक व्यक्ति के खून के बराबर निकले रक्त से देवी को तृप्त किया जायेगा तथा पत्थरों की मार प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा को आयोजित की जाएगी। इस प्रथा को आज भी निभाया जाता है।

इस साल देवीधूरा की विख्यात बग्वाल के एक लाख से अधिक लोग साक्षी बने। बग्वाल में इतिहास ने करवट भी बदली और पुरानी परम्परा भी बरकरार रही। तमाम कोशिशों के बावजूद प्रशासन तथा मंदिर कमेटी की कसरत का अपेक्षित परिणाम नहीं निकला। पहले युद्धवीरों ने फल और फूलों और अंतिम क्षणों में युवा युद्धवीरों ने पत्थरों की बारिश कर सदियों से चली आ रही परम्परा को भी जीवंत रखा। बग्वाल में इस बार 80 से अधिक युद्धवीर घायल हुए।

Bagwal 2बग्वाल में फल-फूलों की बौछारों ने इतिहास में जगह बना ली। पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी ने परम्पराओं को छेड़ने के मामले में सावधानी बरतने को कहा है जबकि पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी ने फल और फूल की बग्वाल शुरू कराने के लिए मंदिर कमेटी संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया को बधाई दी है। बग्वाल में शांति व्यवस्था के लिए पूरे दिन संगीनों का साया रहा। इस बार बग्वाल में सात मिनट फूल और फल और तीन मिनट पत्थरों से युद्ध हुआ। इसमें एक हजार से अधिक युद्धवीरों ने भाग लिया। 21 अगस्त को मां बाराही मंदिर के ऐतिहासिक खोलीखाड़, दुवाचैड़ मैदान में बग्वाल को देखने के लिए कुमाऊं के विभिन्न इलाकों समेत देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों की भीड़ उमड़ी थी।

इस साल सुबह से ही बग्वाल को लेकर लोगों में काफी कौतूहल के साथ ही चिंता भी सता रही थी जबकि चार खाम और सात थोकों के युद्धवीर अपनी परम्परा का निर्वहन करने के लिए 12 बजे से मां बाराही दवी मंदिर में आने शुरू हो गए थे। सदियों पुरानी परम्परानुसार सबसे पहले गहड़वाल खाम के युद्धवीरों ने मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद वालिक खाम के युद्धवीरों ने परम्परा का निर्वहन किया। तीसरे चरण में चम्याल खाम के युद्धवीरों ने मंदिर की परिक्रमा की और रणभूमि में प्रवेश किया जबकि अंत में लमगड़िया खाम के युद्धवीर आए और परिक्रमा के बाद मैदान में चले गए। इस प्रक्रिया में करीब दो घंटे से अधिक का वक्त लगा।

युद्धवीरों के मंदिर में आने से पहले दूसरे हजारों लोगों ने मां बाराही के दर्शन किये। दर्शनों के लिए बग्वाल शुरू होने तक लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर तक सारी पूजा प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मंदिर के पुजारी कीर्तिबल्लभ ने बग्वाल का शंखनाद किया। इस समय घड़ी 2.13 बजा रही थी। इसके साथ ही चारों खामों के युद्धवीर खोलीखाड़, दुवाचैड़ मैदान में एकत्र हो गए और परम्परानुसार चार खाम के लोग दो धड़ों में बंट गए। इनमें वालिक खाम और लमगड़िया खाम के युद्धवीर पूरब की ओर से और चम्याल खाम तथा गहड़वाल खाम के युद्धवीर पश्चिम की दिशा की ओर बग्वाल खेलने के लिए तैयार हो गए। कुछ ही पलों बाद यानी 2 बजकर 14 मिनट पर दोनों ओर से फूल और फल की बग्वाल शुरू हो गयी।

Bagwal 3युद्धवीरों ने फल और फूल की बग्वाल में हजारी, गुलाब के साथ ही नासपाती का प्रयोग किया। यह सिलसिला करीब सात मिनट तक चला। इस बीच पुरानी परम्परा को बरकरार रखने के लिए आतुर दोनों पक्षों के युवाओं ने पत्थरों की बारिश शुरू कर दी। इसे रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन की सारी तैयारियां धरी रह गयी। करीब तीन मिनट तक दोनों ओर से जमकर पत्थरों की बारिश हुई और 80 से अधिक युद्धवीर घायल हो गए। ठीक 2 बजकर 23 मिनट पर पुजारी ने बग्वाल के समापन की घोषणा की। इससे आधुनिक परम्परा की शुरुआत भी हो गयी और पुरानी परम्परा भी बरकरार रही।

पत्थरों की बारिश के दौरान बग्वाल देखने आयी अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मेहनत करनी पड़ी। मैदान के चारों ओर रस्सी की बैरिकेडिंग लगायी गयी थी और कुछ क्षण ऐसे भी आये जब लोग रस्सी की बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश करने लगे, लेकिन तब तक बग्वाल संपन्न हो गयी और जयकारे के साथ लोग अपने घरों की ओर निकलने लगे। वैसे देवीधूरा का वैसर्गिक सौन्दर्य भी मोहित करने वाला है, इसीलिए भी बग्वाल को देखने दूर-दूर से सैलानी देवीधूरा पहँचते हैं।

हिलमेल ब्यूरो

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this