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गैरसैंण के विकास का काम तेज, 50 साल तक पानी की जरूरत पूरा करने को बनेगा बांध

त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आधारभूत ढ़ांचे और भविष्य की योजना को ध्यान में रखते विकास के कई कार्यों को धरातल पर पहुंचाने की गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसी चरण में गैरसैंण में भविष्य की जरूरतों के ध्यान में रखते हुए रामगंगा नदी पर बांध (जलाशय) के निर्माण की तैयारी तेज कर दी गई है। बांध के निर्माण के लिए हाल ही में यूसैक ( उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र) के निदेशक डा. एमपीएस बिष्ट ने बांध साइट का सर्वेक्षण किया।

यह बांध रामगंगा नदी पर बनेगा। सर्वे के दौरान डा. एमपीएस बिष्ट ने कई तकनीकी पहलुओं को शामिल किया और सिचांई विभाग के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों में बरसात में पानी के तेज प्रवाह को देखते हुए बांध का डिजाइन विशेष रूप से 322 क्यूमेक्स जल प्रवाह क्षमता का बनाया जाएगा, जिससे पानी की तेज रफ्तार में भी बांध पूरी तरह से सुरक्षित रह सके। बांध निर्माण के लिए कुल 4.95 हेक्टेयर वन पंचायत भूमि का प्रयोग किया जाएगा। इस भूमि के केवल 0.50 हेक्टेयर में बांध बनेगा जबकि बाकी भूमि पर अन्य ढांचागत सुविधाएं बनाई जाएंगी। सूत्रों के अनुसार परियोजना को जल शक्ति मंत्रालय अनुमति दे चुका है और राज्य स्तर पर हाईड्रोलॉजी संबंधी अनुमति की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।

बांध की मुख्य विशेषताएं

बांध की अनुमानित लागत लगभग 65 करोड़ रुपये होगी और इससे हर दिन 70 लाख लीटर पेयजल की आपूर्ति संभव हो सकेगी। बांध की जल भंडारण क्षमता 3.5 लाख घनमीटर होगी।

गैरसैंण के चौमुखी विकास पर जोर

गैरसैंण के लिए हाल ही में लिए गए एक फैसले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कर्मचारी आवास योजना के लिए 4.59 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की। इसके अलावा गैरसैंण विकास परिषद के तहत विकास कार्यों के लिए 1.50 करोड़ रुपये भी मंजूर किए गए थे। गैरसैंण के सुनियोजित विकास को मुख्यमंत्री के निर्देशों के मुताबिक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति गठित की गई है।

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