Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ युवाओं के सपने को साकार करने में लगे कर्नल कोठियाल
उत्तराखंड न्यूज़हमारी फ़ौज

युवाओं के सपने को साकार करने में लगे कर्नल कोठियाल

NIM 2उत्तराखंड में जून के महीने में आई आपदा में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग (एनआईएम) उत्तरकाशी ने आपदा के दौरान कई इलाकों में फंसे हजारों भारतीय व विदेशी यात्रियों और पर्यटकों को सुरक्षित निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस साल केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां पर हमें जो जल पर्लय देखने को मिला उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस घटना में कई लोग मारे गये और कईयों के घरबार, कारोबार, खेत खलियान बर्बाद हो गये। इस आपदा से निपटने में हमारी सेना, अर्द्धसैनिक बल और एनआईएम के जवानों ने लोगों की बहुत मदद की।

NIM 4नेहरु पर्वतारोहण संस्थान के बचाव दल उत्तरकाशी-गंगोत्री राजमार्ग से हजारों यात्रियों को सफलतापूर्वक बचाकर लाने के बाद सांस ही ले रहे थे कि संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल कोठियाल के सामने दूसरी चुनौती खड़ी हो गयी। इस बार उनका उत्तरकाशी में किये गये सफल बचाव कार्य को देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार ने खुद ही उनसे केदारघाटी में जाने का आग्रह किया और वगैर विलम्ब किये हुए कर्नल कोठियाल स्वयं अपने साथ 12 सदस्यीय दल को लेकर 9 जुलाई को हवाई मार्ग से गुप्तकाशी होकर चैमासी पहंचे। दल ने चैमासी से कालीगंगा होते हुए केदारनाथ पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग की तलाश की है। इस वैकल्पिक मार्ग की तलाश करने के लिए कर्नल कोठियाल ने स्वयं दल का नेतृत्व किया। कर्नल कोठियाल ने चैमासी गांव के कुछ नवयुवको को भी इस दल मे शामिल किया। उनके इस अदम्य साहस और मेहनत के साथ यह दल पैदल केदारनाथ और वापस गौरीकुण्ड, सोनप्रयाग होते हुए फाटा पहुंचा। चैमासी के इन नवयुवको के इस जोश को देखते हुए कर्नल कोठियाल ने नेहरु पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी में इन नवयुवको को बुलाकर इन्हे सेना में भर्ती होने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में आज 50 से ज्यादा नवयुवक सेना में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं।

इसके अलावा एनआईएम ने अपने प्रयासों के जरिए रिहैबिलिटेशन माडल की भी शुरूआत की। इसके तहत प्रभावित इलाकों के बेराजगारों युवाओं को प्रशिक्षण देकर इंडियन आर्मी व अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए तैयार किया जा रहा है और इस प्रशिक्षण के माध्यम से इन युवाओं को काफी सफलता भी मिली। एनआईएम के प्रिसिपल कर्नल अजय कोठियाल ने पहले फेज में कई युवाओं को प्रक्षिशित किया। जिनमें से सात युवा भारतीय सेना में भर्ती हो चुके हैं तथा कई अन्य युवाओं की दूसरे जगहों में नियुक्ति हो गई है। इसके अलावा दूसरे फेज में करीब 55 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

Col Ajay Kothiyal Principal NIMएनआईएस के प्रिसिपल कर्नल अजय कोठियाल का मानना है कि जीवन को दिशा देने में एक शिक्षक की भूमिका बड़ी अहम होती है। इस बात का अहसास उन्हें अब हो रहा हैै। वह कहते हैं कि अस्सी के दशक में मैं देहरादून के हाथी बड़कला स्थित केन्द्रीय विद्यालय का विद्यार्थी था। जहां बीएस सजवाण हमारे इतिहास के शिक्षक थे उनकी बातें शिक्षक की महत्ता के अहसास के साथ ही जाता हो जाती है। पढ़ाई में मैं औसत ही था और जीवनशैली काफी हद तक लापरवाह सी थी। सजवाण सर की बातें कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित करती रहती थी। वे अपनी खासियत पर ध्यान देने और उसे निखार कर ही जीवन में आगे बढ़ने को कहते थे। शुरूआत से ही उनकी यह बात मेंरे मन में बैठ गई थी। स्कूल से निकलने के बाद काॅलेज के दिनों में भी भविष्य के लिए कुछ खास तय नहीं किया था। ग्रेजुएशन के बाद कुछ कर गुजरने की ललक से सीडीएस के जरिये सेना में सकेंड लेफ्टिनेंट बन गया। अपनी खूबियों पर गौर करते हुए ही टेªनिंग के साथ ही अब तक का सफर तय किया है।

NIM Hostelकर्नल कोठियाल को भारतीय सेना में एक जाबांज और साहसी अधिकारी के रुप में जाना जाता है। सन् 2001 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर फतह लहराकर इन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। सन् 2003 में जम्मू कश्मीर के पीर पंजाल की पहाड़ियों पर आंतकवादियों से लोहा लेते हुए इनके द्वारा 7 आतंकवादियों को मार गिराया गया और भी कई आतंकवादियो को ढेर किया जिसके फलस्वरुप भारतीय सरकार द्वारा वीरता का एक और पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। भारत से पहली बार कर्नल कोठियाल के नेतृत्व वाली टीम मांउट मनासलू पर पहुंची जिसके लिए इन्हें वीरता के एक और अलंकरण विशिष्ट सेवा मेडल से विभूषित किया गया। अब कर्नल कोठियाल भारतीय सेना के उन गिने चुने अधिकारियों में से एक हैं जिन्हें इतने अलंकरणों से विभूषित किया गया है। इन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

वाई एस बिष्ट

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...