दिल्ली में भले ही एक दामिनी को इन्साफ मिल गया हो लेकिन अभी भी ऐसी कई और दामिनी हैं जिनकी आत्मा इन्साफ के लिए तड़फ रही है। एक ऐसी ही अभागी बेटी का परिवार कई महीनों से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठा है। 20 वर्षीया
दिल्ली में भले ही एक दामिनी को इन्साफ मिल गया हो लेकिन अभी भी ऐसी कई और दामिनी हैं जिनकी आत्मा इन्साफ के लिए तड़फ रही है। एक ऐसी ही अभागी बेटी का परिवार कई महीनों से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठा है।
20 वर्षीया गरीब युवती किरण नेगी का अपरहण 9 फरवरी 2013 को 8 बजे उस समय कर लिया गया था जब वो काम से घर लौट रही थी। उसकी लाश को रेवाड़ी हरियाणा से बरामद किया गया। लाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किरण के साथ बलात्कार और उसके गुप्तांगो में नुकीली वस्तु के घुसेडे जाने की पुष्टि हुई थी।
किरण का फरवरी को नजफगढ़ इलाके के छावड़ा क्षेत्र से उस समय अपहरण कर लिया गया जब वह गुड़गांव स्थित एक कॉल सेंटर से नौकरी करके घर लौट रही थी। अपनी तीन सहेलियों के साथ जब वह पैदल ही अपने घर की तरफ जा रही थी तभी एक बिना नंबर की कार में सवार चार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया। अपहरण करने के बाद वे उसे हरियाणा ले गए और वहां गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई।
डीपीआईएम के डॉ बछेती के नेतृत्व में कई सामाजिक संगठनों के सैकड़ों लोगों ने जंतर-मंतर पर कैंडिल मार्च निकाल कर इस घटना के प्रति रोष जताया। किरण नेगी के पिता कुंवर सिंह नेगी इस कानूनी लडाई में अपना सब कुछ खो चुके हैं उनकी माली हालत बद से बदत्तर हो गयी है। बावजूद इसके वो जंतर-मंतर पर बने हुए है इस आशा के साथ कि अपनी बेटी के साथ हुई इस घृणित अपराध के अपराधियो को फांसी दिला सकें।
किरण के पिता कुंवर सिंह नेगी के अनुसार उन्होंने वारदात की सूचना तुरंत पुलिस को दी। लेकिन दिल्ली पुलिस को सूचना देने के दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। इस मामले में दिल्ली पुलिस की लापरवाही का यह आलम रहा कि वह भारी पुलिस बल की जांच टीम लगाने के बाद भी चार दिन तक किरण का सुराग लगाने में नाकाम रही।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में विनोद और रवि को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी छावड़ा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। यह भी बताया जा रहा है कि किरण हत्याकांड में कई युवक और भी शामिल हैं। जिन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हिलमेल ब्यूरो







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