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विश्व होम्योपैथी दिवस पर विशेष : होम्योपैथिक औषधियों का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं

होम्योपैथी एक विज्ञान का कला चिकित्सा पद्धति है। होम्योपैथिक दवाइयां किसी भी स्थिति या बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी हैंय बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययनों में होमियोपैथी को प्लेसीबो से अधिक प्रभावी पाया गया है। चिकित्सा के जन्मदाता सैमुएल हैनीमेन हैं, इनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी में हुआ था, इन्होंने सन 1796 में होम्योपैथी की उत्पत्ति की।

यह चिकित्सा के ‘समरूपता के सिंद्धात’ पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियां उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है। जिन्हें रोग के लक्षणों के समान किंतु उनसे प्रबल होना चाहिए। अतः रोग अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से, अविलंब और सदा के लिए नष्ट और समाप्त उसी औषधि से हो सकता है जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सके।

होम्योपैथी पद्धति में चिकित्सक का मुख्य कार्य रोगी द्वारा बताए गए जीवन-इतिहास एवं रोग लक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करने वाली औषधि का चुनाव करना है। रोग लक्षण एवं औषधि लक्षण में जितनी ही अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है।

गंधक, पारा, संखिया, जस्ता, टिन, बेराइटा, सोना, चांदी, लोहा, चूना, तांबा, तथा टेल्यूरियम इत्यादि तत्वों तथा अन्य बहुत से पदार्थों से औषधियां बनाई गई हैं। तत्वों के यौगिकों से भी औषधियां बनी हैं। होमियोपैथी औषधविवरणी में 260 से 270 तक औषधियों का वर्णन किया गया है। इनमें से अधिकांश का स्वस्थ नर, नारी या बच्चों पर परीक्षण कर रोगोत्पादक गुण निश्चित किए गए हैं। शेष दवाओं को विवरणी में अनुभवसिद्ध होने के नाते स्थान दिया गया है।

होम्योपैथी का इलाज भले ही थोड़ा लम्बा चलता है, लेकिन यह जड़ से समस्या को दूर करता है। साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता, इसलिए अधिकतर लोग होम्योपैथी इलाज को प्राथमिकता देते हैं।

होम्योपैथिक औषधियों का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है यह बहुत ही लाभदायक है स्पेशली पुराने रोगों के लिए मेरा यह सब बताने का मुख्य उद्देश्य यह है कि आज के दौर पर होम्योपैथी बहुत ही कारागार हो रही है और बहुत अच्छे फायदे हैं।

साभार : डॉ दीपा चौहान राणा

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