भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2078 के आगमन पर उत्तराखंड में नए दिव्य धाम “बमुरा धाम” की प्राण प्रतिष्ठा की गई। चैत्र महीने की प्रतिपदा को उत्तराखंड में टिहरी गढ़वाल के हेरवाल गांव में “बमुरा धाम” की प्राण प्रतिष्ठा टिहरी राजपरिवार के प्रतिनिधि ठाकुर भवानी प्रताप सिंह एवं दिल्ली विश्व विद्यालय के कार्यकारी परिषद् के सदस्य डॉ.वीरेंद्र सिंह नेगी द्वारा की गई। यह दिव्य धाम दशहरे के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
मंदिर में भव्य शिवलिंग के साथ गणेश जी, दुर्गा माता, काल भैरव, हनुमान जी और राधा कृष्ण की सुन्दर और मनमोहक मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा 4 वेदों, 18 पुराणों और 14 उपनिषदों की उपस्थिति में दिव्य देव डोलियों, देव निशाणो के विहंगम नृत्य देव ढ़ोलो के दिव्य नाद, जल कलश यात्रा, वेद पुराण शोभा यात्रा और वेद मंत्रो के उद्घोष के साथ संपन्न हुई।
वेदों, पुराणों और उपनिषदों को काशी संस्कृत महाविद्यालय, उत्तरकाशी के ब्रह्म कुमारों द्वारा सेम नागराजा के धाम से अभिमंत्रित करवा कर वेदोक्त ऋचाओं के उद्घोष के साथ अपने सिर पर रख कर शोभा यात्रा के रूप में बमुरा धाम में लाकर मंदिर के पुरोहितों को सौंपा गया।
बमुरा धाम में प्रसाद के रूप में चीड़ का फल (जिसे चिलगोजा और स्थानीय भाषा में छेत्ती कहा जाता है) दिया जाएगा। चिलगोजा को अंग्रेजी में पाइन नट्स कहा जाता है। त्योहारों के दिनों में झंगोरे से बने हुए घेन्जा और चीड़ की चाय (पाइन टी) भी प्रसाद के रूप में दी जाएगी।
गणेश जी को शुद्ध घी बने हुए लड्डू का भोग लगाया जाएगा। राधा कृष्णा जी को मक्खन और मिश्री का भोग लगाया जाएगा। भैरव जी को गेहूं के आटे से बने रोठ का भोग लगाया जाएगा। दुर्गा जी को स्थानीय झंगोरे की खीर का भोग लगाया जाएगा। हनुमान जी को गुड़ से बने हुए लड्डू का भोग लगाया जाएगा।
शिवलिंग पर चन्दन के समान पवित्र देव वृक्ष पद्म जिसे स्थानीय भाषा में पंय्यां कहा जाता है के पत्ते चढ़ाये जायेंगे। पंय्यां को अंग्रेजी में हिमालयन वाइल्ड चेरी, बर्ड चेरी भी कहा जाता है, साथ में भांग के पत्ते और भांग का सरबत भी चढ़ाया जायेगा। शिव लिंग का अभिषेक जल और दूध से किया जाएगा, और पंय्यां की लकड़ी से बने लेप से त्रिपुण्ड लगाया जाएगा।
त्यौहार के दिनों में भक्तजन सथनीय फलो और कोदा झंगोरा और मारचू का अन्नकूट कर सकते है। मंदिर का निर्माण ग्रीन स्कूल के संस्थापक वीरेन्द्र रावत ने अपने स्वर्गीय माता पिता के स्मरण करने हेतु किया है।





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