लंबे समय से चल रही कयासबाजी को खत्म करते हुए कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल ने उत्तराखंड के सियासी रण में खम ठोक दिया है। उन्होंने 2022 विधानसभा चुनावओं के मद्देनजर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस कार्यक्रम में वर्चुअल जुड़े थे। उत्तराखंड के सभी विधानसभा क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का वर्चुअल प्रसारण किया गया।
देहरादून में कई पूर्व सैनिकों और युवाओं की मौजूदगी में कर्नल कोठियाल ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी के प्रभारी और दिल्ली में विधायक दिनेश मोहनिया भी उपस्थित थे। कर्नल कोठियाल का पार्टी में स्वागत करते हुए दिनेश मोहनिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने हमेशा मानना रहा कि कोई देशभक्त ही उत्तराखंड में पार्टी का नेतृत्व करेगा। इसी आशा के साथ कर्नल कोठियाल आम आदमी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड विकास की नई राह पर चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस ने बारी-बारी प्रदेश पर शासन किया लेकिन 20 साल में राज्य की भावनाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप विकास नहीं हुआ। अब राज्य को विकास की नई राह पर ले जाने की जरूरत है और कर्नल कोठियाल सच्चे धरती पुत्र का फर्ज निभाएंगे।

कर्नल कोठियाल ने कहा कि युवाओं ने मुझे आगे किया। अब उनके साथ मिलकर बदलेंगे उत्तराखंड। पूरी स्पीच देखने के लिए यहां क्लिक करें….
इस अवसर पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उत्तराखंड में 20 साल में कोई विकास कार्य नहीं हुआ। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी सरकार आने पर लूट-खसोट मचाते रहे हैं। दोनों पार्टियों के नेताओं के स्टिंग आ चुके हैं। दोनों पार्टियां एक-दूसरे के भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई नहीं करते। भाजपा ने प्रचंड बहुमत की सरकार के बाद चार साल में अपना मुख्यमंत्री बदल दिया। नए सीएम पुराने सीएम के फैसले बदल रहे हैं। वहीं आज दिल्ली के मॉडल की पूरे देश में चर्चा हो रही है। हम उत्तराखंड में नवनिर्माण की कहानी लिखेंगे। इसके लिए देवभूमि के पुत्र को आम आदमी पार्टी में शामिल किया गया है। कुछ लोग उन्हें भोले का फौजी कहते हैं, आज मैं भोले के इस फौजी का आम आदमी पार्टी में स्वागत करता हूं। जिस तरह दिल्ली को आप ने भाजपा और कांग्रेस के भ्रष्टाचार से मुक्त कराया, अब उत्तराखंड को भी भ्रष्टाचार से मुक्त करेंगे। मैं उत्तराखंड के लोगों से अपील करता हूं कि 20 साल के भाजपा-कांग्रेस के भ्रष्टाचार को खत्म करने में हमारा साथ दें।
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कर्नल कोठियाल के सियासी रण में उतरने से अगला विधानसभा चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। वह सैकड़ों युवाओं को सेना का हिस्सा बनाने वाले यूथ फाउंडेशन के संस्थापक हैं। उन्हें केदारनाथ में किए गए काम के लिए पहचाना जाता है। केदारनाथ में कर्नल कोठियाल के नेतृत्व में ही आपदा के बाद पुनर्निर्माण का काम शुरु हुआ था। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी ने भी मिशन उत्तराखंड नवनिर्माण के लिए कर्नल कोठियाल को पार्टी में शामिल किया है।
इससे पहले, सोमवार सुबह कर्नल कोठियाल ने हरिद्वार में मां गंगा की पूजा की। इसके बाद उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में कहा,19 अप्रैल हमारे लिए एक बड़ा दिन है। आज हम अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहे है । ऐसे में विचलित होना स्वाभाविक है। इस लिए मां गंगा के दर्शन करने गए और बहुत शांति मिली। हमारा यकीन करना जो भी फैसला लेने जा रहे हैं वो उत्तराखंड के भविष्य के लिए यकीनन अच्छा होगा।

कर्नल अजय कोठियाल उत्तराखंड का एक जाना-पहचाना नाम है। देवभूमि के लाल, पहाड़ के सपूत, भारतीय सेना के जांबाज…. कुछ इसी तरह से उन्हें लोग पुकारते हैं। वह कहते हैं कि खूबसूरत और खुशहाल उत्तराखंड के सपने को साकार करना है। इसके लिए जी जान से मेहनत करनी है।
उन्होंने अपने दम पर निशुल्क युवाओं को सेना में शामिल कराने के लिए यूथ फाउंडेशन नाम से एक भागीरथ प्रयास किया, जो आज सैकड़ों युवाओं की जिंदगी बदल चुका है। बिना सरकार में रहते हुए उन्होंने गरीबों, बेसहारा, बेरोजगारों की चिंता की और उनके लिए यथासंभव प्रयास किया। उन्होंने पलायन रोकने, पहाड़ की बेटियों को सशक्त बनाने और स्वास्थ्य सेवा को घर-घर तक पहुंचाने के प्रयास किए। अब कर्नल कोठियाल नई पारी शुरू कर रहे हैं।
राजनीति में आने को लेकर वह कहते हैं कि अपने समाज सेवा के कार्य को नया आयाम देना चाहते हैं। उत्तराखंड की सियासत में उतरने के ऐलान के बाद से ही उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर बधाई और शुभकामनाएं दी जा रही है।
कर्नल (रिटायर्ड) कोठियाल की केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों में उनके योगदान और यूथ फाउंडेशन के चलते अपनी विशिष्ट पहचान बनी है। कर्नल कोठियाल की लंबे समय से सियासी मैदान में उतरने की कयासबाजी चल रही थी, जो अब साफ हो गई है। उनका कहना है कि वह एक सशक्त उत्तराखंड के जिस लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उसके लिए राजनीति का प्लेटफॉर्म जरूरी है।



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