तुम्हें न भूलेगा हिंदुस्तान…. कारगिल जंग के शहीदों को नमन कर रहा भारत, उत्तराखंड के 75 सपूतों ने भी दी थी शहादत

तुम्हें न भूलेगा हिंदुस्तान…. कारगिल जंग के शहीदों को नमन कर रहा भारत, उत्तराखंड के 75 सपूतों ने भी दी थी शहादत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अन्य मंत्री, नेता, सेना, पूरा देश आज अपने उन वीरों की शहादत पर श्रद्धांजलि दे रहा है जिन्होंने पाकिस्तान को 1999 की लड़ाई में सबक सिखाया था। इस जंग में देश के कई सपूत वीरगति को प्राप्त हुए।

आज पूरा देश कारगिल के जांबाजों को याद कर रहा है, उनकी शहादत को नमन करते हुए नतमस्तक है। आज 26 जुलाई है। पाकिस्तान की हरकत का मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारत के वीरों ने जान की बाजी लगा दी थी और आखिरकार दुश्मन के मंसूबे पस्त हो गए। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ‘कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मैं भारतीय सेना के अदम्य शौर्य, पराक्रम और बलिदान को नमन करता हूं।’ उन्होंने 1.54 मिनट का वीडियो भी शेयर किया है।

आज हर किसी के जुबान पर यही गीत है, तुझे भूलेगा न तेरा हिंदुस्तान…। उत्तराखंड भी 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले सपूतों पर गर्व कर रहा है। देवभूमि के 75 रणबांकुरों ने भी कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया थआ। भारत की सीमाओं की तरफ जब-जब दुश्मन ने आंख उठाने की जुर्रत की है, उसके छक्के छुड़ाने में देवभूमि के रणबांकुरे हमेशा आगे रहे हैं।

उस समय उत्तराखंड के 75 जवानों ने शहादत दी थी। 37 जवान ऐसे थे, जिन्हें युद्ध के बाद उनके शौर्य के लिए सम्मान मिला। उत्तराखंड के बारे में कहा जाता है कि यहां हर घर से नौजवान जांबाज सेना में हैं। शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवभूमि को सैन्य धाम की संज्ञा दी है।

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कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के वीर जवानों की बात करें तो मेजर विवेक गुप्ता, मेजर राजेश अधिकारी को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वीरचक्र विजेताओं में कश्मीर सिंह, बृजमोहन सिंह, अनुसूइया प्रसाद, कुलदीप सिंह, एके सिन्हा, खुशीमन गुरुंग, शशि भूषण घिल्डियाल, रुपेश प्रधान व राजेश शाह थे। मोहन सिंह, टीबी क्षेत्री, हरि बहादुर, नरपाल सिंह, देवेंद्र प्रसाद, जगत सिंह, सुरमान सिंह, डबल सिंह, चंदन सिंह, मोहन सिंह, किशन सिंह, शिव सिंह, सुरेंद्र सिंह व संजय को सेना मेडल प्रदान किया गया था। इसके अलावा मेन्स इन डिस्पैच राम सिंह, हरि सिंह थापा, देवेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, मान सिंह, मंगत सिंह, बलवंत सिंह, अमित डबराल, प्रवीण कश्यप, अर्जुन सेन, अनिल कुमार थे।

जिलेवार आंकड़े देखें तो देहरादून से सबसे ज्यादा 28 जवान शहीद हुए थे। पौड़ी से 13, नैनीताल से 5, अल्मोड़ा पिथौरागढ़ से 4-4, रुद्रप्रयाग से 3, बागेश्वर और उधमसिंह नगर से 2-2 और उत्तरकाशी से एक सपूत वीरगति को प्राप्त हुई थी।

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