उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि सर्दियों के मौसम में चारधाम की यात्रा करना ज्यादा बेहतर है। इस चारधाम यात्रा से देश विदेश के पर्यटक बहुआयामी पर्यटन का आनंद उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों में पहाड़ों में मौसम खुला
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि सर्दियों के मौसम में चारधाम की यात्रा करना ज्यादा बेहतर है। इस चारधाम यात्रा से देश विदेश के पर्यटक बहुआयामी पर्यटन का आनंद उठा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों में पहाड़ों में मौसम खुला रहता है और बरसात के मौसम की तरह यहां बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की सम्भावनाएं भी बहुत कम होती हैं। नयी दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शीतकालीन चारधाम यात्रा को ज्यादा सुविधाजनक व किफायती है।
उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहितों और पण्डा समाज के विद्वान लोगों के आग्रह पर राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा की तर्ज पर ही खरसाली, मुखबा, ऊखीमठ व जोशीमठ के लिए शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरु की है। इससे पर्यटन के नए मौके मिलेंगें। अभी तक प्रदेश में पारम्परिक चारधाम यात्रा अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवम्बर तक करीब 6 महीनों के लिये संचालित होती है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सर्दियों में जहां मैदानी क्षे
त्रों में बहुत ज्यादा धुंध और ठंड रहती है वहीं पहाड़ों में मौसम खुला रहता है और अच्छी धूप रहती है। सर्दियों में पहाड़ों की खिली धूप का आनंद ही अलग है।
इस दौरान बर्फ से ढके हिमालय के भव्य दर्शन किए जा सकते हैं। यात्रा के समय पहाड़ों में बरसात होती है जबकि सर्दियों में बादल फटने, बाढ़ आने, भूस्खलन होने की सम्भावनाएं न के बराबर होती है। सर्दियों में बारिश न होने के कारण न तो भूस्खलन का डर रहता है और न ही सड़कें बंद होने का।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों में ऑफ सीजन होने के कारण पर्यटकों को आर्थिक लाभ भी होगा। अपेक्षाकृत कम दरों पर रहने और आवाजाही की सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। धार्मिक पर्यटन के अलावा पर्यटन की दूसरी गतिविधियां भी फायदेमंद हो सकती हैं।
पर्यटक उत्तरकाशी के धारा, चमोली के औली, रूद्रप्रयाग के दुगलविट्टा-चोपता में स्कीईंग का आनंद ले सकते हैं। वहीं प्रदेश के अधिकांश राष्ट्रीय पार्क 15 नवम्बर से खुल जाते हैं। वाईल्डलाईफ के प्रेमी इसका लुत्फ उठा सकते हैं।
हिलमेल ब्यूरो







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