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सीडीएस जनरल बिपिन रावत की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, एनएसए अजीत डोभाल, कई सैन्य अधिकारियों ने भी किया नमन

दिवंगत चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत की श्रद्धांजलि सभा में कई दिग्गज पहुंचे। नई दिल्ली स्थित सुब्रतो पार्क के वायुसेना सभागार में सीडीएस स्व. जनरल रावत के परिवार ने उनके लिए एक श्रद्धाजंलि सभा रखी थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुखों समेत कई मौजूदा और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी स्व. जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी स्व. श्रीमती मधुलिका रावत जी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।   8 दिसंबर को एक हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 12 अन्य सैन्यकर्मियों का निधन हो गया था। इस दौरान सभी ने भारतीय सेना में सीडीएस जनरल बिपिन रावत के योगदान को याद किया।

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यह भी पढ़ें – अलविदा पर्वतपुत्र: सीडीएस जनरल रावत ने मेडिकल पर दी थी परिवार की सैन्य परंपरा को तरजीह

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देश के पहले सीडीएस और थियेटर कमांड के शिल्पी

जनरल बिपिन रावत सेना में बदलाव लाने के लिए जाने जाते थे। तीनों सेनाओं को पुनर्गठन के महत्वपूर्ण काम को अंजाम देने के लिए हिए उन्हें 31 दिसंबर, 2019 को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) बनाया गया। उनका सबसे बड़ा काम तीनों सेनाओं में तालमेल बिठाने का था। इसके साथ ही तीन साल के भीतर उन्हें सेनाओं का पुनर्गठन कर ‘थिएटर कमांड’ बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। वह जिस थिएटर कमांड प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, वो प्रोजेक्ट चीन और पाकिस्तान से आने वाले खतरों से निपटने में अहम रोल अदा करता। दरअसल थिएटर कमांड्स का सबसे सही इस्तेमाल युद्ध के दौरान तब होता है, जब भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेना प्रमुखों के बीच तालमेल होता है। थिएटर कमांड्स से बनी रणनीतियों से दुश्मन पर अचूक वार करना आसान हो जाता। तीनों सेनाओं के संसाधनों और हथियारों का इस्तेमाल एक साथ किया जा सकता है।

1999 में भारत ने पाकिस्तान के साथ कारगिल की जंग लड़ी। इसके बाद बनी कई समितियों ने थिएटर कमांड और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद की स्थापना के सुझाव दिए थे। 20 साल बाद 15 अगस्त 2019 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीफ ऑफ डिफेंस पद की स्थापना की घोषणा की थी, तब उन्होंने कहा था, ‘तीनों सेनाओं में समन्वय तो है और वे अपने-अपने तरीके से आधुनिकीकरण के लिए भी प्रयास करते हैं लेकिन जिस तरह युद्ध के दायरे और रूप-रंग बदल रहे हैं और जिस तरह की टेक्नोलॉजी की भूमिका बढ़ रही है, उसके कारण भारत को भी टुकड़ों में सोचने से काम नहीं चलेगा, देश की पूरी सैन्‍यशक्ति को एकजुट होकर एक साथ आगे बढ़ना होगा।

अभी देश में करीब 15 लाख सशक्त सैन्य बल है। इन्हें संगठित और एकजुट करने के लिए थिएटर कमांड की जरूरत है। एक साथ कमांड लाने पर सैन्य बलों के आधुनिकीकरण का खर्च कम हो जाएगा। किसी भी आधुनिक तकनीक का प्रयोग सिर्फ एक ही सेना नहीं करेगी बल्कि उस कमांड के अंदर आने वाले सभी सैन्य बलों को उसका लाभ मिलेगा। सीडीएस जनरल बिपिन रावत 4 थिएटर कमांड पर काम कर रहे थे। वह साल 2022 तक थिएटर कमांड के गठन का लक्ष्य लेकर चल रहे थे।

जनरल रावत ने अपने दो साल के कार्यकाल में सेनाओं के एकीकरण के लिए तीन बड़ी एजेंसियां जरूर तैयार कर दी थीं। पहली थी साइबर डिफेंस एजेंसी, दूसरी डिफेंस स्पेस एजेंसी और तीसरी थी स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन। निकट भविष्य में ये तीनों एजेंसियां अलग-अलग कमांड भी बन सकती थीं। सीडीएस जनरल बिपिन रावत का रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण में भी एक बड़ा योगदान था। पिछले पांच-छह साल से थलसेना, वायुसेना और नौसेना में स्वदेशी हथियारों को ही तरजीह दी जा रही थी, तो इसका एक बड़ा श्रेय जनरल रावत को जाता है। अगर विदेशी हथियार और सैन्य साजो-सामान खरीद भी रहे थे तो उसे मेक इन इंडिया के तहत देश में ही निर्माण करने की कोशिश रहती थी।यही कारण था कि थलसेना स्वदेशी अर्जुन टैंक लेने को तैयार हुई और  वायुसेना ने एलसीएच अटैक हेलीकॉप्टर लेने को हामी भरी थी। जनरल बिपिन रावत रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए हमेशा जाने जाते रहेंगे।

 

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