हाल ही में उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त बनाए गए चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर विपिन चंद्र घिल्डियाल ने चार महीने पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। वह जल्द ही सूचना आयुक्त की शपथ लेंगे। भारतीय राजस्व सेवा के 1987 बैच के अधिकारी विपिन चंद्र को 15 फरवरी को आयकर विभाग में आयोजित कार्यक्रम में शानदार विदाई दी गई। जुलाई 2021 में उन्हें उत्तराखंड का चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर बनाया गया था।


विपिन चंद्र का राजस्व सेवा के बेहतरीन अधिकारियों में शुमार होता है। पौड़ी के रिखणीखाल के डाबरी गांव के मूल निवासी विपिन चंद्र ने 8वीं तक की शिक्षा गांव के ही जूनियर हाई स्कूल में ली। इसके बाद उन्होंने नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में की। संयुक्त उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडियट की परीक्षा में वह टॉप-10 टॉपरों में रहे। उन्होंने हाईस्कूल में दसवीं और इंटर में छठी पोजिशन हासिल की। उन्होंने गढ़वाल के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री भी ली है। उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 1985 में फिजिक्स में एमएससी की। इसके बाद 1988 में इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी से फॉरेस्ट्री में मास्टर डिग्री हासिल की। उन्होंने गढ़वाल यूनिवर्सिटी से 2010 में फिलास्फी में पीएचडी भी किया।
आईआरएस में चयन के बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे उज्जैन, मुजफ्फरनगर और नई दिल्ली में इनकम टैक्स आयुक्त (अपील) का दायित्व भी निभाया। विपिन चंद्र 2004 से 2021 तक केंद्र सरकार में प्रतिनुयक्ति पर रहे। वर्ष 2004 से 2009 तक सर्वे ऑफ इंडिया में निदेशक प्रशासन एवं वित्त के पद पर रहे। साल 2017 से 2021 तक वह केंद्रीय अर्थ साइंस विभाग में संयुक्त सचिव रहे। उन्होंने नेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी) के अध्यक्ष एवम प्रबंध निदेशक का जिम्मा भी संभाला।
सरकार ने मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्त की नियुक्ति की थी। पूर्व नौकरशाह अनिल चंद्र पुनेठा को राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त वऔर विवेक शर्मा को राज्य सूचना आयुक्त बनाया गया। वहीं दूसरे सूचना आयुक्त बनाए गए विपिन चंद्र घिल्डियाल मुख्य आयकर आयुक्त के पद पर होने के चलते शपथ नहीं ले सके। अब वीआरएस लेने के बाद वह कभी भी सूचना आयुक्त के पद की शपथ ले सकते हैं।
विपिन चंद्र घिल्डियाल ने गढ़वाल यूनिवर्सिटी के इनवॉयरमेंटल साइंस विभाग के पूर्व प्रमुख आरसी शर्मा के साथ ‘नेचुरल रिसोर्सेस एंड दियर मैनेजमेंट इन गढ़वाल हिमालया’ भी लिखी है।


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