राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरूण कुमार मिश्रा, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविन्द प्रसाद शर्मा, निदेशक युवराज मलिक और निरंजन देव भारद्वाज की उपस्थिति में ‘एनवायरमेंटल रिनेसंस’ पुस्तक का एबीटी सभागार में विमोचन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि अरूण कुमार मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है क्योंकि पर्यावरण की कीमत पर बेलगाम विकास का परिणाम मानव-जाति का विलुप्त होना ही होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर पुस्तकों का हिंदी के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद किया जाना चाहिए और देश के सबसे बड़े प्रकाशक के रूप में यह जिम्मेदारी एनबीटी के कंधों में है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान के कुलपति महेश चंद्र पंत ने अपने संबोधन में इस महत्वपूर्ण विषय पर एक नया दृष्टिकोण लाने के लिए लेखक की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण दुनिया भर में चर्चा का एक मुख्य विषय है, फिर भी इन विचारों को अमल में लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर संवेदीकरण की आवश्यकता है और यह छात्रों को व्यावहारिक तरीकों से प्रकृति पर हमारी निर्भरता के बारे में सिखाकर प्राप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर एनबीटी के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविन्द प्रसाद शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में इस बात पर जोर दिया कि कैसे एनबीटी ने वैश्विक महत्व के विषयों पर किताबें प्रकाशित करने के लिए भारत के युवा लेखकों को एक मंच प्रस्तुत करने में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण पुनर्जागरण पुस्तक न केवल चिंता के मुद्दों को सामने लाते हैं, बल्कि व्यावहारिक समाधान भी प्रदान करती है जिसका पाठक व्यक्तिगत स्तर पर अनुसरण कर सकता है।
एनबीटी के डारेक्टर युवराज मलिक ने सभी सम्मानित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संकट पर अपनी टिप्पणियों को स्पष्ट और सरल तरीके से अपनी पुस्तक में प्रस्तुत करने के लिए लेखक की भी सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि एनबीटी भविष्य में इस पुस्तक को अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद करेगा।



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