सत्ता वापसी के बाद योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा 37 साल पुराना मिथक, नोएडा जाने से डर चुके थे छह मुख्यमंत्री

सत्ता वापसी के बाद योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा 37 साल पुराना मिथक, नोएडा जाने से डर चुके थे छह मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी दोबारा से सरकार बना रही है उसे भारी बहुमत मिला है और योगी आदित्यनाथ इस इतिहास को रच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के जीत के बाद उनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हो गये हैं। सत्ता वापसी के बाद योगी आदित्यनाथ ने 37 साल से चले आ रहे मिथक को तोड़ दिया है।

पांच राज्यों के विधान सभा के चुनाओं के परिणाम लगभग आ ही गये हैं। जिन पांच राज्यों में चुनाव हुए थे उनमें से भारतीय जनता पार्टी ने पांच में से चार राज्यों में सरकार बना रही है वहीं एक राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बन रही है। बीजेपी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में अपनी सरकार दोबारा बना रही है वहीं पंजाब की जनता ने आप को भारी बहुमत से विजयी बनाया है। अब आप के ऊपर पंजाब की जतना के वादों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी है।

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी दोबारा से सरकार बना रही है उसे भारी बहुमत मिला है और योगी आदित्यनाथ इस इतिहास को रच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के जीत के बाद उनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हो गये हैं। सत्ता वापसी के बाद योगी आदित्यनाथ ने 37 साल से चले आ रहे मिथक को तोड़ दिया है।

पिछले चार दशक से उत्तर प्रदेश में जितने भी मुख्यमंत्री हुए हैं वह नोएडा जाने को अपना एक अपशगुन मानते थे। इनके बारे में यह माना जाता था कि नोएडा जाने वाले हर मुख्यमंत्री की कुर्सी सुरक्षित नहीं रहती है। उसकी सत्ता में वापसी नहीं होती। इस कारण कुछ मुख्यमंत्री तो नोएडा जाने से बचते रहते थे। अगर किसी मुख्यमंत्री को उद्घाटन या शिलान्यास को लेकर कार्यक्रम के सिलसिले में वहां जाने की जरूरत पड़ी तो नोएडा न जाकर अगल-बगल या दिल्ली के किसी स्थान से इस काम को पूरा कर लेते थे। लेकिन योगी आदित्यनाथ ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने इस मिथक को तोड़ा और कई बार नोएडा गए। उन्होंने पांच साल मुख्यमंत्री रहकर इस मिथक तोड़ा और अब उन्होंने सत्ता में वापसी कर ली है।

यह मिथक 1985 से चल रहा है जब वीर बहादुर सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब नोएडा जाने के बाद उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी चली गई थी। उसके बाद नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया गया। कुछ समय बाद चुनाव हुए, लेकिन वह कांग्रेस की सत्ता में वापसी नहीं करा पाए। इसके बाद कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव के साथ भी ऐसा ही हुआ कि वह नोएडा गए और कुछ दिन बाद संयोग से मुख्यमंत्री पद छिन गया। जब राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे तो उन्हें नोएडा में निर्मित एक फ्लाईओवर का उद्घाटन करना था उन्होंने नोएडा की जगह दिल्ली से इसका उद्घाटन किया।

छः मुख्यमंत्रियों के बाद अब योगी आदित्यनाथ पहले मुख्यमंत्री हुए हैं जिन्होंने इस मिथक को तोड़ा है। उनसे पहले के मुख्यमंत्री हमेशा नोएडा जाने से डरते थे। वह समझते थे कि अगर नोएड़ा गये तो उनकी खुर्सी पर खतरा पैदा हो जायेगा लेकिन योगी आदित्यनाथ अपने कार्यकाल के दौरान कई बार नोएडा आए और उन्होंने खुले मंच से कहा कि यह एक अंधविश्वास है। यहां आने से मुख्यमंत्री की कुर्सी को खतरा पैदा नही होता है और यह उन्होंने सिद्ध करके भी दिखा दिया है।

इन विधान सभा चुनावों में जनता ने अपने नेतृत्व की विश्वसनीयता पर मोहर लगाई है। यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भी नरेंद्र मोदी का जादू चला है। अगर हम देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां पर भी मोदी और योगी का जादू चला है। अगर हम सरकार के विजयी होने के फार्मूले की बात करें तो उनमें सरकारी योजनाओं का जनता के दिलों में जगह बनाना, सरकार द्वारा गरीब और पिछड़े लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ देना, हिन्दुत्व का मुद्दा, आरआरएस और बीजेपी की जुगलबंदी से लोगों को बूथ तक ले जाना। ये सारी चीजे हैं जिनसे बीजेपी ने इन राज्यों में दोबारा से सरकार बना रही है।

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