विश्व विख्यात चिपको आंदोलन की सूत्रधार गौरा देवी को पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्ष 2016 में राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड सरकार की ओर से उत्तराखंड रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया था। उनको यह पुरस्कार मरणोपरांत चुना गया इसके अलावा नौ अन्य लोगों को उत्तराखंड रत्न के लिए चयनित किया गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिपको आंदोलन की सूत्रधार गौरा देवी के 78 वर्षीय बेटे चंद्र सिंह राणा और सोहन सिंह राणा को मुख्यमंत्री आवास में पुरस्कार की राशि सौंपी। इस सम्मान में पांच लाख एक रुपये और प्रशस्ति पत्र दिया गया। गौरा देवी के पुत्र चंद्र सिंह ने तो इस धनराशि की उम्मीद छोड़ दी थी। उनके परिजनों को उत्तराखंड रत्न के नाम पर सिर्फ प्रशस्ति पत्र सौंपा गया, लेकिन सम्मान निधि की पांच लाख की धनराशि नहीं मिली थी।
गौरतलब रहे कि उत्तराखंड शासन ने गौरा देवी के पुत्र चंद्र सिंह से वारिस प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाणत्र की मांग की थी जिसे उन्होंने उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद को दे दिया था। लेकिन इतना समय गुजरने के बाद भी उन्हें धनराशि का भुगतान नहीं हुआ। फिर समाचार पत्रों ने इस बात को प्रमुखता से उठाया और उसके बाद सरकार जागी। उन्होंने इस मामले को गम्भीरता से लिया और आज इस धनराशि को गौरा देवी के पुत्र को सौंप दिया गया।


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